Sehore: वीवीआईपी जिले का शर्मनाक रिकॉर्ड…

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Sehore News: सीहोर। कहने को तो सीहोर जिला प्रदेश की राजनीति का केंद्र है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का गृह जिला होने के नाते यहां विकास की गंगा बहनी चाहिए थी, लेकिन हकीकत इसके उलट है। जल संरक्षण के सरकारी दावों की पोल खुल चुकी है। प्रदेशभर में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान में सीहोर जिले की रैंकिंग लगातार गिरते हुए अब शर्मनाक स्तर पर पहुंच गई है। जिला प्रदेश की सूची में अंतिम पायदान (52) पर पहुंच गया है।
बता दें भूजल स्तर को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देशों पर शुरू किया गया यह अभियान सीहोर में सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है। सिस्टम की फिसड्डी कार्यप्रणाली के कारण नवीन जल संरचनाओं का निर्माण और पुरानी बावडिय़ों व तालाबों का पुनरुद्धार अधर में लटका है। खेत तालाब, डगवेल रिचार्ज और अमृत सरोवर जैसे महत्वपूर्ण कार्य कछुआ गति से चल रहे हैं। आलम यह है कि जो कार्य पहले से स्वीकृत हैं, विभाग उन्हें भी पूर्ण नहीं कर पाया है। नतीजतन रैंकिंग में जिले की साख मिट्टी में मिल गई है।
सूखाग्रस्त जिला, बावजूद लापरवाही
मालूम हो कि कलेक्टर बालागुरु के. ने पहले ही जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर रखा है। निजी बोर खनन पर सख्त प्रतिबंध है। इसके बावजूद लापरवाही बरती जा रही है। बीते माह केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वयं दिशा की बैठक में जल संकट से निपटने के सख्त निर्देश दिए थे, बावजूद अमला ‘सुस्ती मोड’ में है।
प्रशासनिक तंत्र फेल, पर सीवन पुत्रों ने जगाई आस
एक तरफ जहां प्रशासन अभियान में फिसड्डी साबित हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय नागरिक अपनी मेहनत से मिसाल पेश कर रहे हैं। इसे ‘दिया तले अंधेरा’ ही कहेंगे कि मुख्यालय की जीवनदायिनी सीवन नदी जलकुंभी से पटी पड़ी है, लेकिन प्रशासन के पास इसके लिए इच्छाशक्ति का अभाव है। नतीजतन यहां सरकारी अभियान के बजाय जन-भागीदारी से सीवन का उद्धार हो रहा है।
कलेक्टर ने भी जताई नाराजगी
जिले की खराब रैंकिंग और विभाग की सुस्ती को लेकर कलेक्टर बालागुरु के. ने सोमवार को टीएल बैठक में कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई।
पैरामीटर बदले हैं
मनरेगा अधिकारी प्रमोद त्रिपाठी ने बताया कि पैरामीटर में बदलाव हुआ है, जिसकी वजह हम डाउन हो गए हैं, हम बदले हुए पेरामीटर पर काम कर रहे हैं, हम फिर से ऊपर हो जाएंगे।