Sehore News: सीहोर। मां नर्मदा के पावन तट पर स्थित गुंजारी संगम घाट शनिवार को जन-चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा का जीवंत प्रतीक बन गया। मौका था जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत स्वच्छता और घाट संरक्षण कार्य का, जहां प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और नर्मदा परिक्रमा के प्रखर तपस्वी पूज्य दादा गुरु जी महाराज ने स्वयं श्रमदान कर समाज को स्वच्छता का संदेश दिया।
मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का इस अभियान के लिए पुन: आगमन केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं रहा। उन्होंने खुद फावड़ा उठाकर और सफाई कर यह स्पष्ट कर दिया कि नेतृत्व जब स्वयं आचरण करता है, तभी वह जन आंदोलन बनता है। श्री पटेल ने कहा कि स्वच्छता को केवल एक सरकारी अभियान न मानकर जीवन का संस्कार बनाना होगा। जब हर व्यक्ति इसे अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझेगाए तभी हमारी नदियां और जल संरचनाएं स्थायी रूप से संरक्षित रह सकेंगी।
दादा गुरु की आध्यात्मिक उपस्थिति
इस आयोजन में चार बार नर्मदा परिक्रमा पूर्ण कर चुके और केवल नर्मदा जल का आहार लेने वाले पूज्य दादा गुरु जी महाराज की उपस्थिति ने वातावरण को भक्तिमय कर दिया। दादा गुरु ने संगम स्थल के विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि नदियां केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि हमारी जीवन रेखा और सनातन संस्कृति का आधार हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री और मंत्री प्रहलाद पटेल के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि वर्षों से उपेक्षित रहे इस प्राचीन घाट को पुनर्जीवित करना एक अनुकरणीय कार्य है।
प्राचीन धरोहर को मिल रहा नया जीवन
मंत्री श्री पटेल ने संगम स्थल पर चल रहे संरक्षण कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए कि विकास कार्य इस तरह किए जाएं कि घाट की प्राचीनता और प्राकृतिक सुंदरता बनी रहे। गुंजारी नर्मदा संगम घाट पर जिस प्रकार जनभागीदारी बढ़ रही है, वह अब अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है।
प्रशासन, अध्यात्म और जनशक्ति का संगम
यह आयोजन केवल सफाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें प्रशासन की सक्रियता, संतों का आशीर्वाद और आम जनता का उत्साह एक साथ देखने को मिला। मां नर्मदा की कल-कल बहती धारा के बीच जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि वे अपनी प्राकृतिक धरोहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखेंगे।


