Sehore: कुत्ता कार्ड देखकर नहीं काटता साहब…

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Sehore News: सीहोर। जिला अस्पताल प्रबंधन अपने एक हास्यप्रद निर्णय को लेकर चर्चा में है। अस्पताल में कुत्ता काटने (डॉग बाइट) के बाद इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को अब दर्द से राहत मिलने के बजाय कागजी औपचारिकताओं का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने फरमान सुनाया है कि रेबीज का इंजेक्शन तभी लगेगा जब मरीज के पास आयुष्मान कार्ड होगा।
बता दें बुधवार को श्वान के काटने पर अस्पताल पहुंचे एक मरीज को उस वक्त गहरा झटका लगा, जब ड्यूटी डॉक्टर ने उसे इंजेक्शन लगाने से साफ इनकार कर दिया। डॉक्टर का दो टूक कहना था कि पहले आयुष्मान कार्ड बनवाइए, उसके बाद ही रेबीज का इंजेक्शन लग सकेगा। अब सवाल यह उठता है कि क्या कुत्ता कार्ड देखकर काटता है या क्या रेबीज जैसा जानलेवा संक्रमण कार्ड बनने तक रुका रहेगा। अस्पताल प्रबंधन का यह रवैया न केवल संवेदनहीन है, बल्कि गरीब मरीजों के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को अवहेलना
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि स्कूल, अस्पताल और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों को आवारा कुत्तों से मुक्त रखा जाए। पकड़े गए कुत्तों को शेल्टर होम में भेजने के आदेश थे। लेकिन सीहोर में स्थिति इसके उलट है। जिला मुख्यालय सहित जिले में कहीं भी कुत्तों को पकडऩे या नसबंदी करने की मुहिम नहीं दिख रही है। शहर का चाणक्यपुरी क्षेत्र हो या बस स्टैंडए हर जगह कुत्तों के झुंड बच्चों और बुजुर्गों के पीछे दौड़ते नजर आते हैं। कोचिंग जाने वाले मासूम बच्चे इन आवारा कुत्तों के खौफ में जीने को मजबूर हैं।
हर दिन 30 शिकार, महीने में 900 मामले
जिले में आवारा कुत्तों के आतंक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर महीने औसत 800 से 900 डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं। यानी हर दिन करीब 25 से 30 लोग इन कुत्तों का शिकार बन रहे हैं। बावजूद इसके नगर पालिका-नगर परिषदों द्वारा शिकायतों को नजरअंदाज कर रहे हैं। अभिभावकों को सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ते समय हर पल डर लगा रहता है कि कहीं कोई झुंड उनके बच्चे पर हमला न कर दे।
कानून में कड़ी सजा का प्रावधान
बता दें भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 291 के तहत यदि कोई पालतू पशु किसी को चोट पहुंचाता है तो मालिक को 6 महीने की कैद या 5 हजार रुपये जुर्माना हो सकता है। वहीं यदि हमला जानबूझकर कराया गया हो तो धारा 109 और 115 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।