Sehore News: सीहोर। इछावर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम चंदेरी, रामाखेड़ी और आसपास के अंचलों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों को तबाही के मोड़ पर खड़ा कर दिया है। खेतों में बिछ चुकी सुनहरी फसल और खुले में भीगते अनाज को देखकर किसानों का धैर्य जवाब दे गया। समाजसेवी और किसान नेता एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसानों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रदर्शन किया।
इछावर क्षेत्र के किसानों का दर्द यह है कि उनकी मेहनत की कमाई यानी गेहूं की फसल अब धीरे-धीरे कचरे में तब्दील हो रही है। समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू न होने के कारण किसानों ने मजबूरी में अपना गेहूं घरों के बाहर और खलिहानों में खुले आसमान के नीचे रखा था। अचानक हुई बारिश ने इस अनाज को पूरी तरह भिगो दिया है। प्रदर्शनकारी किसानों ने आक्रोश में कहा एक तरफ ओलों ने खड़ी फसल उजाड़ दी, दूसरी तरफ भीगा हुआ गेहूं अब कोई खरीदने को तैयार नहीं है। सरकार सो रही है और किसान दाने-दाने को मोहताज हो रहा है।
कर्ज का बोझ और बेटी की शादी
किसान शिवचरण मेवाड़ा ने रुंधे गले से बताया कि सिर पर 4 लाख का कर्ज है और घर में बेटी की शादी तय है। फसल बर्बाद होने के बाद अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि बारात का स्वागत करेंगे या बैंक का कर्ज चुकाएंगे। इसी तरह मुकेश कुशवाहा की 8 एकड़ की फसल घर के बाहर भीगकर खराब हो गई, क्योंकि घर में रखने की जगह नहीं थी और खरीदी केंद्र बंद थे। बाबूलाल मेवाड़ा भी अपनी आंखों के सामने फसल को सड़ता देख मानसिक रूप से टूट चुके हैं।
वसूली के नाम पर प्रताडऩा
किसानों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों ने कहा कि एक तरफ जहां किसान कुदरत की मार झेल रहा है, वहीं दूसरी ओर बिजली विभाग और बैंक वसूली के लिए दबाव बना रहे हैं। किसानों का कहना है कि बकाया बिलों के नाम पर उनके ट्रैक्टर और मोटरसाइकिलें जब्त की जा रही हैं। किसानों ने सवाल उठाया कि जब फसल बिकी ही नहीं और जो बची थी वह भी भीग गई तो हम किश्तें कहां से भरें. क्या सरकार हमें खुदकुशी के लिए मजबूर कर रही है.
मुआवजा दें सरकार
किसान नेता एमएस मेवाड़ा ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल सर्वे कराकर उचित राहत राशि दी जाए। उन्होंने मांग की कि बिना देरी किए गेहूं की खरीदी शुरू की जाए और वसूली पर तुरंत रोक लगाई जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया और बीमा क्लेम नहीं मिला तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।


