Sehore News: सीहोर। आष्टा नगर पालिका आम जनता से टैक्स वसूलने और कागजी दावों में जितनी मुस्तैद दिखती है, जमीनी स्तर पर उसकी तैयारी उतनी ही खोखली और ‘अपाहिज’ है। रविवार सुबह भोपाल-इंदौर बाईपास चौपाटी स्थित रऊफ भाई के गैरेज में लगी भीषण आग ने नपा के आपदा प्रबंधन की धज्जियां उड़ाकर रख दीं। दमकल विभाग की आपराधिक लापरवाही के कारण ग्राहकों की 15 से 20 गाडिय़ां मलबे में तब्दील हो गईं और करोड़ों का नुकसान हो गया। पूरी घटना में सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि जब शहर जल रहा था, तब नगर पालिका के पास आग बुझाने के लिए न तो पर्याप्त पानी था और न ही गाडिय़ां चालू हालत में थीं।
इस अग्निकांड ने साबित कर दिया है कि पुराने बस स्टैंड पर खड़ी नगर पालिका की दमकल गाडिय़ां सिर्फ दिखावे के लिए हैं। रविवार सुबह जब गैरेज के पीछे जल रहे कचरे की चिंगारी ने विकराल रूप लिया तो नपा को तुरंत सूचना दी गई। लेकिन नपा का अमला आधे घंटे तक कुंभकर्णी नींद में सोया रहा।
पीडि़त आमीर ने मीडिया से चर्चा में बताया कि नपा की दमकलों का यह हाल है कि एक फायर ब्रिगेड पहले से पंचर लावारिस खड़ी थी, जबकि दूसरी गाड़ी की चाबी ही नपा कर्मियों को नहीं मिल रही थी। अंत में पीडि़त पक्ष के एक युवक को खुद गाड़ी को स्टार्ट करवाकर मौके पर लाया।
5 मिनट का पानी और फिर आधे घंटे इंतजार
नगर पालिका की नाकामी का तमाशा यहीं खत्म नहीं हुआ। पीडि़त आमिर के मुताबिक जो दमकल जैसे-तैसे मौके पर पहुंची, उसमें पानी का प्रेशर और मात्रा इतनी कम थी कि महज 5 मिनट में ही टैंक खाली हो गया। इसके बाद वह दमकल पानी रीफिल करने के नाम पर जो निकली तो अगले आधे घंटे तक वापस ही नहीं लौटी। इस बीच गैरेज में खड़ी गाडिय़ां एक-एक कर जलती रहीं और नपा का अमला मूकदर्शक बना रहा।
नपा की व्यवस्था से जनता नाराज
सुबह 7.30 बजे से लेकर 8.30 बजे तक आग का तांडव चलता रहा, करोड़ों की गाडिय़ां स्वाहा हो गईं, लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष या प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी जनता का दर्द सुनने मौके पर नहीं पहुंचा। जब सरकारी सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया तो स्थानीय लोगों और पीडि़तों ने खुद अपनी जेब से पैसे खर्च कर टैंकर बुलवा और कोठरी से आई दूसरी दमकल की मदद से जैसे-तैसे आग पर काबू पाया।
आखिर किस बात का टैक्स ले रही है नपा
अग्निकांड के बाद से आष्टा की जनता का गुस्सा नगर पालिका अध्यक्ष और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ सातवें आसमान पर है। दुकान मालिकों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह हादसा नहीं, बल्कि नगर पालिका द्वारा किया गया प्रशासनिक ब्लैकमेल है। अगर फायर ब्रिगेड समय पर पानी से भरी और मुस्तैद हालत में आती तो ग्राहकों की गाडिय़ों को खाक होने से बचाया जा सकता था।


