Sehore: अब लोगों का खून बहा रहा निर्माणाधीन हाउसिंग बोर्ड आरओबी

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Sehore News: सीहोर। शहर से पुराने भोपाल-इंदौर हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए हाउसिंग बोर्ड ओवरब्रिज राहत की जगह आफत बन चुका है। जिस पुल को महीनों पहले शुरू हो जाना चाहिए था, वह लेतलतीफी के कारण अब लोगों के खून बहने की वजह बन रहा है। वादे पर वादे फेल हो रहे हैं और जनता प्रशासन की इस लापरवाही का भारी खामियाजा भुगत रही है।
बता दें ब्रिज कॉर्पोरेशन ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि जून के अंत तक हाउसिंग बोर्ड ओवरब्रिज पर ट्रैफिक शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन जून का महीना खत्म होने के बाद भी पुल के ऊपर सिर्फ सन्नाटा पसरा है। यह पहली बार नहीं है, इस ओवरब्रिज को पहले जनवरी में ही शुरू होना था। जनवरी से जून आया और अब जुलाई आ गया है, लेकिन काम है कि खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।
कीचड़ में गिर रहे स्कूली बच्चे और राहगीर
अब जब बारिश का दौर शुरू हो चुका है तो इस आधे-अधूरे ब्रिज से लगी पुरानी सडक़ पर भारी कीचड़ मच गया है। सडक़ पर इतनी फिसलन है कि आए दिन गाडिय़ां फिसल रही हैं। रोज सुबह स्कूल जाने वाले बच्चे इस कीचड़ में गिर रहे हैं, जिससे उनकी यूनिफॉर्म खराब हो रही है और वे चोटिल हो रहे हैं। गुरुवार को ही इस कीचड़ की वजह से एक बड़ा हादसा हो गया। बाइक फिसलने के कारण अजय सीठा नाम के व्यक्ति बुरी तरह घायल हो गए। उनके चेहरे से खून बहने लगा। इस हादसे के बाद अब स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है और लोग पूछ रहे हैं, आखिर कब तक लोगों का खून बहाएगा यह आरओबी।
99 फीसदी काम पूरा, पर डामर नहीं है
जब इस बदहाली और देरी पर ब्रिज कॉर्पोरेशन के सब इंजीनियर कैलाश वर्मा से बात की गई तो उनका कहना था कि हाउसिंग बोर्ड ओवरब्रिज का 99 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। सिर्फ एक प्रतिशत काम बाकी है, जो कि अंतिम चरण का डामरीकरण करना है। जैसे ही डामर की सप्लाई मिलेगीए काम पूरा कर रास्ता खोल दिया जाएगा। हैरान करने वाली बात यह है कि यह डामर कब तक आएगा, इसका जवाब किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के पास नहीं है।
पहले ईरान-इजराइल युद्ध, अब सप्लाई का रोना
लगभग 57 करोड़ रुपये की लागत से दो ब्रिज हाउसिंग बोर्ड ब्रिज (28 करोड़ और फंदा आरओबी 29 करोड़) बन रहे हैं। पहले ब्रिज कार्पोरेशन ने बहाना बनाया कि ईरान-इजराइल युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डामर नहीं मिल रहा, इसलिए काम लेट हुआ। अब जब नई तारीख जून भी निकल गई तो स्थानीय स्तर पर डामर की किल्लत का रोना रोया जा रहा है।
मुआवजे की डिमांड का इंतजार
बात सिर्फ डामर की नहीं है, ब्रिज से नीचे उतरते समय रास्ते में एक दीवार भी बाधा बनी हुई है। सब इंजीनियर वर्मा के मुताबिक इस दीवार को हटाने या इसके मुआवजे को लेकर जिला प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक डिमांड लेटर ब्रिज कॉर्पोरेशन को नहीं मिला है। कॉर्पोरेशन का कहना है कि जैसे ही प्रशासन लेटर देगा वे तुरंत फंड जारी कर देंगे। बहरहाल जो, फिलहाल तो दोनों ब्रिज पर ट्रैफिक शुरू नहीं होने से शहरवासी परेशान हैं।