सीहोर। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने इस वर्ष को कृषक वर्ष घोषित किया है, जिसका उद्देश्य किसानों का सम्मान करना और उनकी आय बढ़ाना है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। सीहोर जिले में बिजली विभाग ने किसानों के खिलाफ जो मोर्चा खोला हैए उसने सरकार के किसान हितैषी दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। विभाग महज 67 हजार रुपये की बकाया राशि के लिए किसानों के 5 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले ट्रैक्टर कुर्क कर रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और बढ़ते जन आक्रोश के बीच बिजली कंपनी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। जनसंपर्क विभाग के माध्यम से जारी जानकारी में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के उप महाप्रबंधक संजीव सिंह ने स्वीकार किया कि जिले में कुर्की की कार्रवाई जारी है। उन्होंने बताया कि ग्राम रलावती के किसान मोर सिंह पर घरेलू और कृषि पंप का कुल 67 हजार 806 रुपये बकाया था। विभाग का दावा है कि 12 मार्च को अंतिम नोटिस देने के बाद ही नियमानुसार ट्रैक्टर की जब्ती की गई है।
मंडी में छुट्टी, खेतों में फसल, किसान आखिर कहां से लाए पैसा
बिजली विभाग की यह कार्रवाई उस समय हो रही है जब किसान सबसे ज्यादा लाचार है। वर्तमान में गेहूं और अन्य फसलें खेतों में खड़ी हैं। कटाई और थ्रेसिंग के लिए किसान को ट्रैक्टर की सबसे अधिक जरूरत है, लेकिन विभाग उसी आधार को छीन रहा है। सीहोर की मंडियों में फिलहाल अवकाश है और समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीदी ने अभी रफ्तार नहीं पकड़ी है। ऐसे में किसान के पास बिल भरने के लिए नगद राशि उपलब्ध नहीं है। जिस ट्रैक्टर के सहारे किसान अपनी उपज मंडी ले जाकर कर्ज चुकाने की सोच रहा था, अब वही ट्रैक्टर विभाग के कब्जे में है।
सत्ता पक्ष की खामोशी और कांग्रेस का हमला
हैरानी की बात यह है कि कृषक वर्ष मनाने वाले सत्ताधारी दल के स्थानीय नेता इस पूरी कार्रवाई पर मौन साधे हुए हैं। दूसरी ओर कांग्रेस ने इसे सरकार की श्दोहरी नीतिश् बताया है। कांग्रेस का आरोप है कि एक तरफ मंचों से किसानों के सम्मान की बातें हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ गनमैन के साये में किसानों के घरों से ट्रैक्टर उठवाए जा रहे हैं।
अन्नदाता का अपमान या वसूली
ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। किसानों का कहना है कि सरकार और विभाग को कम से कम फसल बिकने तक का इंतजार करना चाहिए था। 5 लाख का ट्रैक्टर 67 हजार के लिए जब्त करना किसी सम्मान से कम नहीं, बल्कि अन्नदाता का सरेआम अपमान है।


