सीहोर। अधर्म का नाश कर धर्म की ध्वजा स्थापित करने वाले जगत पालक भगवान विष्णु के सातवें अवतार, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्मोत्सव श्री रामनवमी इस वर्ष 27 मार्च शुक्रवार को जिले भर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि और पुनर्वसु नक्षत्र के विशेष संयोग ने इस पर्व को और भी अमृतमय बना दिया है।
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार त्रेता युग में भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर मध्याह्न काल दोपहर में हुआ था। शास्त्रानुसार इस बार शुक्रवार को पडऩे वाला यह मुहूर्त सभी दोषों का नाशक और सर्व सिद्धि प्रदायक माना गया है। नवरात्रि की पूर्णाहुति और प्रभु श्रीराम के प्राकट्य उत्सव के कारण यह दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी है।
मध्याह्न काल में करें अभिषेक और पूजन
पंडित शर्मा ने बताया कि श्रद्धालुओं को शुक्रवार दोपहर मध्याह्न काल में प्रभु का विशेष अभिषेक और पूजन करना चाहिए। भगवान को तुलसी दल, कमल पुष्प और खीर-मिष्ठान का भोग अर्पण करना श्रेष्ठ रहता है। इस दिन राम-राम, सीता-राम का जाप, श्री रामचरितमानस, सुंदरकांड और श्री राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से मनुष्य के समस्त संकट दूर होते हैं और अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
संघर्ष को वरदान बनाने की शिक्षा देता है राम का जीवन
भगवान श्रीराम का जीवन केवल एक कथा नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए आदर्श है। उन्होंने 14 वर्ष के वनवास काल के दौरान विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और मर्यादा का पालन करना सिखाया। उन्होंने वानर राज सुग्रीव और हनुमान जी के सहयोग से लंका पर विजय प्राप्त की और समाज की सभी जातियों को एक सूत्र में बांधकर भारत निर्माता के रूप में नए आयाम स्थापित किए।
दान-पुण्य और उत्सव की तैयारी
रामनवमी के अवसर पर जिले के सभी राम मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालु अपने घरों के द्वार पर वंदनवार सजाएंगे और रंगोली बनाकर खुशियां मनाएंगे। पंडित सुनील शर्मा ने जोर देते हुए कहा कि इस दिन गौ सेवाए अन्न और वस्त्र दान का विशेष महत्व है। जरूरतमंदों की सहायता करने से प्रभु श्रीराम की विशेष कृपा प्राप्त होती है।


