पूर्व #शिक्षा मंत्री पटेल बोले, क्या सागर जैसी घटना का इंतजार…

@सीहोर। नर्मदा किनारे बसे शाहगंज क्षेत्र में धड़ल्ले से फल फूल रहे अवैध शराब के काले कारोबार को लेकर राजनीति गरमा गई है। प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजकुमार पटेल ने शाहगंज सहित पूरे क्षेत्र में जारी अवैध शराब की बिक्री पर स्थानीय प्रशासन और शासन को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने समाचार पत्रों की रिपोर्टिंग का हवाला देते हुए सोशल मीडिया पर सीधा सवाल पूछा है कि जब मीडिया लगातार इस नेटवर्क का पर्दाफाश कर रहा है तो फिर इस पर स्थायी रोक लगाने में प्रशासन क्यों नाकाम साबित हो रहा है।
पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अवैध शराब बेचने वालों पर केवल छोटी-मोटी कार्रवाई कर इतिश्री कर ली जाती है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष और गहरी जांच होनी चाहिए। शराब कहां से सप्लाई हो रही है, कौन इसे बिकवा रहा है और बार-बार धरपकड़ के बावजूद यह कारोबार कैसे निर्बाध रूप से चल रहा है, इसकी परतें खुलना बेहद जरूरी है।
नर्मदा तट की मर्यादा का दिया हवाला
राजकुमार पटेल ने चेतावनी भरे लहजे में आगाह करते हुए कहा कि नर्मदा तट की मर्यादा, सामाजिक वातावरण और युवाओं के भविष्य को देखते हुए प्रशासन को बिना किसी दबाव और भेदभाव के सख्त कदम उठाने चाहिए। शाहगंज सहित गांव-गांव में बिक रही अवैध शराब पर तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लगे। प्रशासन जवाब दे कि ठोस कार्रवाई के लिए क्या बंडोल जैसी किसी बड़ी आपराधिक त्रासदी का इंतजार किया जा रहा है।
5 महीने में दर्ज हुए 69 केस
बता दें शाहगंज पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित है। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में शराब बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया था और वर्तमान सरकार भी इस नीति पर काम कर रही है। इसके बावजूद शाहगंज में अवैध शराब की बिक्री जारी है। पुलिस आंकड़ों के अनुसार महज बीते 5 महीनों में ही 69 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
बुधनी क्षेत्र के प्रभावी नेता हैं राजकुमार पटेल
बुधनी विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल की गिनती प्रभावशाली नेताओं में होती है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा सीट खाली करने के बाद हुए उपचुनाव में राजकुमार पटेल ने भाजपा प्रत्याशी को कड़ी टक्कर दी थी। वर्ष 2023 के चुनाव में जहां शिवराज सिंह चौहान 1 लाख से अधिक मतों से जीते थे, वहीं उपचुनाव में राजकुमार पटेल ने इस अंतर को समेटकर केवल 13 हजार तक ला दिया था।