इस बार 16 नहीं, 15 दिन के होंगे पितृपक्ष…

#Sehore, सीहोर। सनातन संस्कृति में पूर्वजों के प्रति आदर और कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन पर्व पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) इस वर्ष 26 सितंबर शनिवार से प्रारंभ होने जा रहा है। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार यह भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की कृष्ण पक्ष सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या यानी 10 अक्टूबर शनिवार तक चलेगा। इस बार अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन सम्मिलित होने के कारण यह पितृपक्ष पूरे 15 दिनों का रहेगा।
पंडित शर्मा ने बताया कि शास्त्रों में मनुष्य पर तीन मुख्य ऋण- देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण बताए गए हैं। पितृपक्ष इन ऋणों से मुक्त होने का सर्वोत्तम समय है। गरुड़ पुराण के अनुसार श्राद्ध पक्ष के दौरान पूर्वज सूक्ष्म रूप में पृथ्वी लोक पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा अर्पित अन्न, जल और श्रद्धा को स्वीकार कर उन्हें सुख, शांति व समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। जिन पूर्वजों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती, उनका श्राद्ध सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या को किया जाता है।
गौ सेवा, दान और पौधारोपण का विशेष महत्व
पितृपक्ष की अवधि में श्रद्धालु नर्मदा, पार्वती और सिवन नदी के घाटों या अपने घरों पर तिल, जौ और कुशा से पितरों को जल अर्पित कर तर्पण करेंगे। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस दौरान निम्न कार्यों का विशेष पुण्य फल मिलता है…
ब्राह्मण भोजन व दान: पितरों के निमित्त ब्राह्मण भोजन, अन्नदान, वस्त्रदान और जरूरतमंदों की सेवा करें।
गौ सेवा: पितृपक्ष में गायों को ग्रास देना अत्यंत शुभ माना जाता है।
धार्मिक पाठ: पूर्वजों की आत्मा की सद्गति के लिए श्रीमद्भागवत कथा, पितृ भागवत और पितृ सूक्त का पाठ कराएं।
पितृपक्ष की तिथिया
26 सितंबर: पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर: प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर: द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर: तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर: चतुर्थी श्राद्ध
01 अक्टूबर: पंचमी श्राद्ध एवं महाभरणी
02 अक्टूबर: षष्ठी श्राद्ध
03 अक्टूबर: सप्तमी श्राद्ध
04 अक्टूबर: अष्टमी एवं नवमी मातृ नवमी श्राद्ध
05 अक्टूबर: दशमी श्राद्ध
06 अक्टूबर: एकादशी श्राद्ध
07 अक्टूबर: द्वादशी संन्यासी श्राद्ध
08 अक्टूबर: त्रयोदशी श्राद्ध
09 अक्टूबर: चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर: सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या