स्कूल शिक्षा विभाग में रोस्टर के नाम पर बड़ा खेल, पदोन्नति में कर्मचारियों से भेदभाव

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Sehore News: सीहोर। मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में पिछले 13 वर्षों (साल 2013) से रुकी हुई पदोन्नति की प्रक्रिया जब दोबारा शुरू हुई तो कर्मचारियों में उम्मीद की किरण जागी थी। लेकिन जिले का स्कूल शिक्षा विभाग आज भी अपनी पुरानी ढर्रे वाली कार्यप्रणाली और गंभीर अनियमितताओं के चलते विवादों के घेरे में है। जिले में पदोन्नति के नाम पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के साथ खुलेआम भेदभाव और रोस्टर के नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लग रहे हैं। हालात यह हैं कि 30-30 साल तक निष्ठापूर्वक सेवा देने के बाद भी कई पात्र कर्मचारी अपने हक के प्रमोशन से वंचित हैं।
नियमानुसार मध्य प्रदेश शासन के हर विभाग में पदोन्नति के दौरान अनुसूचित जाति संवर्ग को 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति संवर्ग को 20 प्रतिशत आरक्षण का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है। लेकिन जिले के स्कूल शिक्षा विभाग में इन संवैधानिक प्रावधानों को दरकिनार किया जा रहा है। विभाग द्वारा न तो लिपिक संवर्ग और न ही अन्य संवर्गों की अंतरिम पदक्रम सूची का सही और पारदर्शी तरीके से प्रकाशन किया जा रहा है। जानबूझकर सूची में कमियां रखी जा रही हैं, जिसके चलते लाभान्वित होने वाले और वरिष्ठ कर्मचारियों के नाम ही गायब कर दिए जा रहे हैं।
शिक्षा विभाग में क्यों बहानेबाजी
पीडि़त कर्मचारियों और संगठनों ने सवाल उठाया है कि जब मध्य प्रदेश शासन के आबकारी विभाग और उद्योग विभाग जैसे अन्य विभागों में पद रिक्त न होने की स्थिति में भी क्राइटेरिया के अनुसार यथास्थान पदोन्नति पद पर उन्नयन का कार्य सुचारू रूप से किया जा रहा है तो फिर अकेले स्कूल शिक्षा विभाग में ही रिक्त पदों की समस्या का रोना क्यों रोया जा रहा है। आखिर क्यों सिर्फ इसी विभाग के अधिकारियों को नियम लागू करने में परेशानी आ रही है।
रिटायर्ड कर्मचारी भी परेशान
बता दें जिला प्रशासनिक सुस्ती के मामले में पूरे प्रदेश में पिछड़ता नजर आ रहा है। यहां केवल पदोन्नति ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के वित्तीय लाभों पर भी कुंडली मारकर अफसर बैठे हैं। जिले में 35 वर्षों की लंबी सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को शासन के निर्देशानुसार चतुर्थ समयमान वेतनमान का लाभ मिलना था, लेकिन विभाग ने अब तक इस आदेश का पालन नहीं किया है। हद तो यह है कि जो कर्मचारी विभाग की सेवा करते-करते सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उनके अर्जित अवकाश नकदीकरण के भुगतान के मामले भी महीनों से लंबित पड़े हैं। बुजुर्ग पेंशनर्स को अपने ही हक के पैसों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
कर्मचारियों में आक्रोश्र आंदोलन की सुगबुगाहट
भेदभावपूर्ण रवैये और रोस्टर की हेराफेरी से परेशान अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के कर्मचारियों में विभाग के खिलाफ गहरा असंतोष पनप रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि जिला शिक्षा कार्यालय ने जल्द ही अपनी गलतियों को नहीं सुधारा, सही रोस्टर लागू कर संशोधित पदक्रम सूची जारी नहीं की और कर्मचारियों को उनका वाजिब हक नहीं दिया तो वे इस भेदभाव के खिलाफ आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।