Sehore News: सीहोर। जिले में भीषण जल संकट इस कदर गहरा गया है कि अब प्यास का दर्द आंसुओं के रूप में बहने लगा है। मंगलवार को प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के निर्वाचन क्षेत्र इछावर की दर्जनों ग्रामीण महिलाएं खाली बर्तन लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। अपनी व्यथा सुनाते हुए महिलाएं इस कदर भावुक हुईं कि कई मीडिया के सामने ही फूट फूटकर रोने लगीं तो भीषण गर्मी और प्यास के कारण कुछ महिलाएं बेहोश होकर गिर पड़ीं।
बता दें ग्राम मानपुर, अमरुद, पचामा और जामिनी जैसे दर्जनों गांवों से आई इन महिलाओं ने बताया कि गांवों के सभी हैंडपंप सूख चुके हैं। पीने के पानी के लिए उन्हें 2 किलोमीटर दूर खेतों में झिरी खोदकर कपड़े से छानकर मटमैला पानी निकालना पड़ रहा है। महिलाओं ने रुंधे गले से कहा सडक़-बिजली न हो तो चल जाएगा पर पानी बिना जीवन कैसे चले, स्थिति इतनी खराब है कि कई परिवार गांव छोडक़र पलायन कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री और मंत्रियों के आदेश भी फाइलों में दबे
ज्ञापन देने आए ग्रामीणों ने बताया कि एक महीने पहले भोपाल जाकर मुख्यमंत्री निवास और मुख्य सचिव कार्यालय में गुहार लगा चुके हैं। वहां से तत्काल नलकूप खनन के निर्देश भी दिए गए थे। प्रभारी मंत्री और पीएचई मंत्री के लिखित आदेश के बावजूद जिला प्रशासन ने अब तक एक भी नया बोर नहीं कराया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अफसरों की लापरवाही के कारण जनता बूंद-बूंद को तरस रही है।
विभाग का तर्क, बजट की कमी बनी बाधा
ग्रामीणों का कहना है कि जब इस संबंध में पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री एमपी सक्सेना से बात की गई तो उन्होंने बजट की कमी बताई। उन्होंने बताया कि इस बार लक्ष्य पिछले साल की तुलना में 70 प्रतिशत घटा दिया गया है। जहां पहले 100 बोर का लक्ष्य मिलता था, इस बार मात्र 30 का बजट मिला है। अब विभाग समिति बनाकर तय करेगा कि ये 30 बोर कहां किए जाएं। इस जवाब पर ग्रामीणों ने तीखी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब तक विभाग समिति बनाएगा, तब तक मानसून आ जाएगा।
अब भोपाल में होगा प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि यदि जल्द ही नए बोर नहीं कराए गए तो वे भोपाल कूच करेंगी और मुख्यमंत्री निवास के साथ-साथ प्रभारी मंत्री के बंगले का घेराव करेंगी। मौके पर पहुंचे तहसीलदार ने ज्ञापन लेकर शीघ्र समस्या समाधान का आश्वासन दिया है।


