ईरान-इजराइल युद्ध का असर, रमजान में खजूर का स्वाद हुआ महंगा

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सीहोर। खुदा की इबादत के महीने रमजान में इस बार रोजेदारों की खजूर की मिठास महंगी होती जा रही है। खाड़ी देशों विशेषकर ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर शहर के फल बाजार पर देखने को मिल रहा है। मांग अधिक और आपूर्ति कम होने के कारण खजूर की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक का इजाफा हो गया है।
बता दें जिला मुख्यालय के फल व्यापारी मुख्य रूप से राजधानी भोपाल के थोक बाजारों हमीदिया रोड और जुमेराती से खजूर मंगवाते हैं। भोपाल में यह खजूर ईरान, इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से मुंबई बंदरगाह के रास्ते ट्रकों द्वारा पहुंचता है। सीहोर के फल व्यापारी सलीम भाई ने बताया कि ईरान से आने वाली प्रसिद्ध कीमिया और मजाफती खजूर की आवक सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। युद्ध की स्थिति के कारण शिपमेंट में देरी हो रही है और ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा भी बढ़ गया है।
किस्मों के हिसाब से आसमान छू रहे दाम
बाजार में अलग-अलग किस्मों के खजूर की कीमतों ने रोजेदारों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। ईरान की कीमिया खजूर अपनी कोमलता के लिए फेमस है, यह खजूर अब पिछले साल के मुकाबले काफी महंगे दामों पर बिक रही है। जबकि सऊदी अरब से आने वाली अजवा और कलमी इन खजूरों की भी उपलब्धता कम होने से इनके दाम में इजाफा हुआ है। ईराक से आने वाली जहरी और सूखी खजूर के भाव बढ़ गए हैं।
रमजान में खजूर की अहमियत
रमजान के दौरान इफ्तार (रोजा खोलने) के लिए खजूर का होना जरूरी माना जाता है। धार्मिक मान्यता सुन्नत के साथ-साथ इसका वैज्ञानिक महत्व भी है, क्योंकि दिनभर के उपवास के बाद यह शरीर को तत्काल ऊर्जा प्रदान करता है। शहर के बाजार खजूर की खपत रमजान में कई गुना बढ़ जाती है, लेकिन इस बार युद्ध की वजह से सप्लाई चैन टूटने से व्यापारी और उपभोक्ता दोनों परेशान हैं। फल व्यापारियों का कहना है कि यदि खाड़ी देशों में तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में खजूर की किल्लत और ज्यादा बढ़ सकती है।