Sehore, जयंती विशेष: त्यागी की सादगी और संघर्ष ने बनाया सीहोर को भाजपा का अभेद्य किला

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Sehore News: सीहोर। राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनकी विरासत केवल उनके कार्यकाल तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे आने वाली पीढिय़ों के लिए एक मजबूत आधारशिला रख जाते हैं। भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व विधायक स्व. मदनलाल त्यागी एक ऐसे ही व्यक्तित्व थे। आज उनकी जयंती के अवसर पर जिले भर के कार्यकर्ता और आमजन उन्हें याद कर रहे हैं। त्यागी जी की सादगी और संगठनात्मक क्षमता का ही परिणाम है कि आज सीहोर विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी के एक मजबूत गढ़ के रूप में स्थापित है।
स्व. मदनलाल त्यागी का राजनीतिक सफर संघर्ष की मिसाल रहा है। उन्होंने 1985 में पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन तब उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और संगठन के लिए निरंतर कार्य करते रहे। उनकी मेहनत और जनता के प्रति समर्पण को देखते हुए 1990 में भाजपा ने उन पर फिर विश्वास जताया। इस बार त्यागी जी ने न केवल शानदार जीत दर्ज की, बल्कि मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने में भी अहम भूमिका निभाई।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीहोर सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के बाद मदनलाल त्यागी ही वे दूसरे नेता थे, जिन्होंने भाजपा के बैनर तले इस सीट पर जीत का परचम लहराया। उनकी इस जीत ने सीहोर में भाजपा की नींव को इतना मजबूत किया कि तब से अब तक इस सीट पर कांग्रेस को वापसी का मौका नहीं मिला।
कैलाश जोशी के रहे विश्वसनीय
त्यागी जी केवल एक विधायक नहीं, बल्कि कुशल संगठनकर्ता भी थे। वे पूर्व मुख्यमंत्री और राजनीति के संत कहे जाने वाले स्व. कैलाश जोशी के बेहद करीबी माने जाते थे। जोशी जी ने उनकी कार्यक्षमता को देखते हुए उन्हें सीहोर में अपना सांसद प्रतिनिधि नियुक्त किया था। इसके अलावाए उन्होंने भाजपा जिलाध्यक्ष के रूप में लंबे समय तक काम किया और पार्टी की विचारधारा को घर-घर तक पहुंचाया।
सरल छवि के धनी थे
पार्टी के बड़े नेताओं से लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच वे त्यागी जी के नाम से मशहूर थे। उनकी पहचान एक ऐसे सहज और सरल नेता की थी, जिसका दरवाजा हर किसी के लिए हमेशा खुला रहता था। राजनीतिक सक्रियता के साथ-साथ वे सामाजिक कार्यों में भी अग्रणी रहे, जिसके चलते उन्हें एक प्रमुख सामाजिक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। आज उनकी जयंती पर सीहोर के लोग उस नेता को नमन कर रहे हैं जिसने राजनीति को पद और सत्ता के रूप में नहीं, बल्कि जनसेवा और संगठन विस्तार के माध्यम के रूप में जिया।