Sehore: सीएस की अजीब सफाई…

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Sehore News: सीहोर। जिला अस्पताल अपनी लचर व्यवस्थाओं और आए दिन होने वाले विवादों के कारण एक बार फिर कटघरे में है। अस्पताल के सबसे संवेदनशील माने जाने वाले पीआईसीयू वार्ड में बीती रात मरीज के परिजनों और स्टाफ के बीच जमकर लात-घूंसे चले्र जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ तौर पर झूमाझटकी और पीडि़त की फटी हुई शर्ट दिखाई दे रही है। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन और सिविल सर्जन अपनी कमियों को छुपाने के लिए मामले में लीपापोती करने में जुटे हैं। सिविल सर्जन द्वारा जारी की गई सफाई पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसे आम लोग गैर-जिम्मेदाराना रवैया मान रहे हैं।
घटनाक्रम के अनुसार जिला अस्पताल के विशेष वार्ड पीआईसीयू में, जहां अत्यंत गंभीर रूप से बीमार छोटे बच्चे भर्ती रहते हैं, आधी रात को अचानक भारी हंगामा खड़ा हो गया। किसी बात को लेकर अस्पताल स्टाफ और एक मरीज के अटेंडेंट के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। दोनों पक्षों के बीच जमकर लात-घूंसे चले। हाथापाई इस कदर बढ़ी कि परिजन के कपड़े तक फट गए। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे, चीख-पुकार के कारण वार्ड में भर्ती अन्य मासूम बच्चों के परिजन बुरी तरह भयभीत और सहम गए। अस्पताल परिसर में हालात बेकाबू होते देख तुरंत पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने दोनों पक्षों को शांत कराया।
सीएस का अजीब दावा, नहीं हुई कोई अभद्रता
इस पूरे मामले में मचे बवाल के बाद सिविल सर्जन डॉ. यूके श्रीवास्तव द्वारा एक आधिकारिक सफाई जारी की गई है, जो जमीनी हकीकत और वायरल वीडियो से बिल्कुल जुदा है।
सीएस की ओर से जारी वस्तुस्थिति के अनुसार 8 जून को शाम करीब 5.05 बजे एक 2.5 वर्षीय बालक मास्टर विराट को सडक़ दुर्घटना में गंभीर चोट आने के कारण आपातकालीन इकाई में लाया गया था। बालक के सिर में गंभीर चोट होने के कारण उसे पीआईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। चिकित्सकों ने उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए न्यूरोसर्जन को दिखाने और तत्काल भोपाल रेफर करने की सलाह दी थी।
सीएस का दावा है कि रात 9.30 से 10.30 बजे के बीच मरीज के कई परिजन एक साथ अस्पताल पहुंचे और इलाज सही न होने का आरोप लगाकर डॉक्टरों से विवाद करने लगे। सीएस ने साफ तौर पर कहा कि अस्पताल के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा मरीज के परिजनों के साथ कोई अभद्रताए दुव्र्यवहार या मारपीट नहीं की गई है। उनके मुताबिकए रात करीब 1.30 बजे परिजन अपनी प्राइवेट एम्बुलेंस से बालक को ले गए और अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद थी।
वायरल वीडियो खोल रहा दावों की पोल
एक तरफ जहां सिविल सर्जन आधिकारिक बयान जारी कर कह रहे हैं कि अस्पताल में किसी प्रकार की मारपीट या दुव्र्यवहार की घटना नहीं हुई, वहीं सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा वीडियो कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि किस तरह मर्यादाएं तार-तार हुईं और झूमाझटकी में कपड़े तक फट गए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर मारपीट नहीं हुई तो वीडियो में दिख रही फटी शर्ट और हंगामा किसका है, अस्पताल प्रशासन का यह रवैया उनकी सुरक्षा व्यवस्था की कमियों और गैर-जिम्मेदाराना प्रबंधन को उजागर करता है।