Sehore: ‘शिवराज’ की मौजूदगी में सीहोर में गूंजे अनूठे गीत…

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Sehore News: सीहोर। इसे एक बड़ा राजनीतिक संयोग कहें या फिर बिजली संकट से बेहाल जनता का अनूठा सब्र, रविवार को जब देश के केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सीहोर जिला मुख्यालय पर मौजूद थे, ठीक उसी समय उनसे महज 5 किलोमीटर की दूरी पर उनके नाम के शिकायती भजन गूंज रहे थे। दरअसल केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान रविवार को जिला मुख्यालय पर आयोजित भारतीय जनता पार्टी के एक प्रशिक्षण वर्ग में शामिल होने पहुंचे थे। ठीक इसी दौरान मुख्यालय के नजदीक स्थित चंदेरी गांव और बिलकिसगंज रोड पर बिजली कटौती से त्रस्त किसानों ने ढोलक-मंजीरे उठाकर सरकार के खिलाफ अपना अनूठा ‘भजन सत्याग्रह’ किया जा रहा था।
बता दें भीषण गर्मी और रातों को होने वाली अघोषित बिजली कटौती से परेशान ग्राम चंदेरी और ग्राम बरखेड़ी के किसान रविवार को भोपाल रोड स्थित बिलकिसगंज क्षेत्र में एकत्रित हुए। एक तरफ जिला मुख्यालय पर वीआईपी मूवमेंट चल रहा था तो दूसरी तरफ चंदेरी गांव में किसान सडक़ किनारे बैठकर अनोखे अंदाज में सरकार तक अपनी पीड़ा पहुंचा रहे थे। समाजसेवी और किसान एमएस मेवाड़ा द्वारा विशेष रूप से लिखे गए इस भजन के जरिए किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और शिवराज भैया से ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली कटौती तुरंत बंद करने की गुहार लगाई।
मच्छर काटे, भीषण गर्मी लगे, अब तो दया कीजे दाता
चिलचिलाती धूप और उमस के बीच ढोलक-मंजीरे की थाप पर गूंजे इस भजन के बोल इतने मर्मस्पर्शी थे कि वहां से गुजरने वाले राहगीर भी हैरान रह गए। किसानों ने सामूहिक सुर में गाया कि हे शिव, हे मोहन, ऐसी कृपा कीजिये, मोदीजी हम ग्रामीणों को भी बिजली दे दीजिये।
रात-रात भर बिजली कटती, शिवराज भैया तुम भी सुन लो, हमको रात में बिजली दीजिए। मोदी-मोदी कह रही दुनिया, हम ग्रामीणों का संकट दूर कीजिए। मोहन भैया आप हमारी विनती सुन लीजिए, अरे मच्छर भी काटे, भीषण गर्मी भी लगे, अब तो दया कीजिए, सारी ग्रामीण जनता तड़प रही है।
44 डिग्री के टॉर्चर में रात भर जागने को मजबूर जनता
भजन गा रहे ग्रामीणों ने अपनी वास्तविक और जमीनी दिक्कतों को बयां करते हुए बताया कि क्षेत्र में इस समय पारा 44 डिग्री के पार पहुंच चुका है। ऐसी जानलेवा गर्मी के बीच रात में दो से तीन बार, दो-दो और तीन-तीन घंटे के लिए अघोषित रूप से बत्ती गुल कर दी जाती है। उमस और मच्छरों के भारी प्रकोप के कारण छोटे बच्चों और बुजुर्गों का रात भर सोना दूभर हो गया है। नींद पूरी न होने और भीषण गर्मी के चलते गांवों में बीमारियां पैर पसार रही हैं। इसके अलावा बिजली ठप रहने से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का संकट भी गहरा गया है।
शहरों में उजाला, तो गांवों में ही कटौती क्यों
किसानों ने बिजली कंपनी के रवैये पर सीधा भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि जब शहरों में चौबीस घंटे निर्बाध बिजली मिल रही है तो केवल ग्रामीण क्षेत्रों को ही इस नरकीय स्थिति में क्यों धकेला जा रहा है। किसानों ने मांग की है कि यदि वास्तव में प्रदेश में बिजली का कोई संकट है तो सबसे पहले औद्योगिक क्षेत्रों और बड़ी फैक्ट्रियों की बिजली काटी जाए, न कि पसीना बहाकर देश का पेट भरने वाले किसानों और ग्रामीणों की।