Sehore: मोहन सरकार के प्रयासों से आत्मनिर्भर बनीं ममता यादव…

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Sehore News: सीहोर। कभी सीमित संसाधनों और संकोच भरे माहौल में जीवन जीने वाली बुधनी तहसील के ग्राम पानगुराडिय़ा की ममता यादव आज आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार के सकारात्मक प्रयासों और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से ममता ने न केवल अपने जीवन की दिशा बदली, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि यदि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो महिलाएं अपनी एक अलग पहचान बना सकती हैं।
बता दें करीब 38 वर्षीय ममता यादव ने साल 2017 में आत्मनिर्भर बनने और खुद का व्यवसाय शुरू करने के उद्देश्य से देवांशी स्व सहायता समूह की सदस्यता ली थी। शुरुआत में उनके सामने आत्मविश्वास की कमी और जानकारी का अभाव जैसी कई चुनौतियां थीं, लेकिन समूह से जुडऩे के बाद उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता और उद्यमिता संबंधी मार्गदर्शन मिला। इससे उनका हौसला बड़ा और वे समूह के कामों में सक्रिय हो गईं।
ऋण सहायता से शुरू की साड़ी की दुकान
ममता यादव के सपनों को असली आधार तब मिला जब समूह के माध्यम से 10 हजार रुपये की रिवॉल्विंग फंड और 1.50 लाख रुपये का सीआईएफ/सीसीएल लोन मिला। इसके बाद साल 2022 में उन्हें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 2 लाख रुपये का लोन और स्वीकृत हुआ। इस पूरी आर्थिक सहायता का सही उपयोग करते हुए ममता ने अपने ही गांव में साडिय़ों की एक दुकान शुरू की।
आज बन चुकी हैं गांव का भरोसा, टर्नओवर 3.60 लाख पार
व्यवसाय की शुरुआत भले ही आसान नहीं थी, लेकिन ममता ने अपनी कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच के दम पर दुकान को आगे बढ़ाया आज उनकी दुकान पानगुराडिय़ा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में एक भरोसेमंद प्रतिष्ठान बन चुकी है। वर्तमान में उनकी दुकान से हर महीने 25 से 30 हजार रुपये तक की साडिय़ा बिक जाती हैं। दुकान का सालाना टर्नओवर लगभग 3.60 लाख रुपये तक पहुंच गया है। सब खर्चे निकालकर ममता अब सालभर में 1.10 लाख रुपये से अधिक की शुद्ध बचत कर रही हैं। इस शानदार उपलब्धि के कारण वे आज क्षेत्र में लखपति दीदी के नाम से जानी जाती हैं।
अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणास्त्रोत
ममता यादव की यह सफलता सिर्फ उनकी आर्थिक तरक्की की कहानी नहीं है, बल्कि समाज में बदलाव का एक बड़ा उदाहरण है। आज वे अपने गांव और आसपास की दूसरी महिलाओं को भी स्व सहायता समूहों से जुडऩे, खुद का रोजगार शुरू करने और पैरों पर खड़े होने के लिए प्रेरित कर रही हैं। ममता यादव की यह प्रेरक यात्रा बताती है कि आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ उठाया गया हर छोटा कदम बड़ी सफलता का आधार बन सकता है। उनकी यह कहानी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उद्देश्यों को पूरी तरह साकार करती है और यह साबित करती है कि महिला सशक्तिकरण अब बदलते भारत की एक सशक्त वास्तविकता है।