सीहोर। चैत्र माह की नवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 19 मार्च गुरुवार से प्रारंभ हो रहा है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी होगी। बालाजी ज्योतिष अनुसंधान एवं परामर्श केंद्र के ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ गणेश शर्मा ने बताया कि इस बार माता दुर्गा का आगमन पालकी (डोली) पर हो रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष संकेतों वाला माना जा रहा है।
पंडित शर्मा के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के लिए दो प्रमुख मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे…
प्रथम मुहूर्त सुबह: 06.52 से 07.43 बजे तक।
द्वितीय मुहूर्त दोपहर: 12.05 से 12.53 बजे तक।
पालकी पर होगा आगमन
पंडित शर्मा ने बताया कि देवी पुराण के अनुसार नवरात्रि में माता जिस वाहन पर सवार होकर आती हैं, उसका देश-दुनिया पर गहरा प्रभाव पड़ता है। पंडित सौरभ शर्मा ने बताया कि पालकी पर माता का आगमन शुभ नहीं माना जाता है। पालकी की सवारी आर्थिक मंदी, प्राकृतिक आपदाओं और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का संकेत देती है। यह समय देश-दुनिया के लिए अस्थिरता भरा हो सकता है, इसलिए माता की विशेष आराधना अनिवार्य है।ष्
भूलकर भी न करें ये गलतियां
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि नवरात्रि के व्रत और पूजन जितने प्रभावशाली हैं, उनके नियम भी उतने ही कठिन हैं। भक्तों को इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए…
स्वच्छता: कलश स्थापना से पूर्व पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। खंडित कलश का प्रयोग बिल्कुल न करें।
स्थान न छोड़े: एक बार घट स्थापना होने के बाद नौ दिनों तक उस स्थान को खाली न छोड़े। कलश को बार-बार हिलाएं या अपवित्र हाथों से न छुएं।
वर्जित कार्य: इन नौ दिनों में बाल और नाखून काटना वर्जित है। साथ ही दिन में सोने से परहेज करना चाहिए।
सात्विकता: घर से तामसिक भोजन प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा पूरी तरह बाहर कर दें और सात्विक जीवन शैली अपनाएं।


