सीहोर। जिला मुख्यालय के समीप चितावलिया हेमा स्थित कुबेरेश्वर धाम में सात दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव और शिव महापुराण कथा का शुक्रवार को भव्य समापन हो गया। विठलेश सेवा समिति ने दावा किया है कि इस बार आस्था के सभी रिकॉर्ड टूट गए हैं और सात दिनों में 25 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई। हालांकि एक बड़ा विडंबना यह भी चर्चा में रही कि इतने बड़े आयोजन और लाखों की भीड़ के बावजूद पिछले सालों की तरह इस बार भी प्रदेश के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हो सके।
कुबेरेश्वर धाम में आयोजित होने वाला यह महोत्सव मप्र बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है, जहां देश भर से श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन आयोजन के इतिहास में अब तक प्रदेश के मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति एक अनसुलझा सवाल बनी हुई है। इस बार भी लाखों भक्तों को उम्मीद थी कि सूबे के मुखिया इस महाकुंभ का हिस्सा बनेंगे, लेकिन सात दिन बीत जाने के बाद भी वे यहां नहीं पहुँचे।
रील बनाने वालों को पंडित मिश्रा की नसीहत
कथा के अंतिम दिन पंडित प्रदीप मिश्रा ने युवाओं को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अध्यात्म का मतलब रील बनाना नहीं, बल्कि जीवन की हकीकत में परमात्मा को महसूस करना है। उन्होंने कहा भगवान क्रीम या बाहरी चमक-धमक से नहीं, बल्कि ईमानदारी और संस्कारों से मिलते हैं। उन्होंने भक्तों से नशा त्यागने और एक लोटा जल के संकल्प के साथ जीवन सुधारने की अपील की।
स्टेशन पर श्रद्धालुओं का रेला
समिति प्रवक्ता मनोज दीक्षित के अनुसार शुक्रवार को समापन के बाद जब करीब 10 से 12 लाख श्रद्धालु एक साथ घर वापसी के लिए निकलेए तो इंदौर-भोपाल हाईवे की रफ्तार थम गई। घंटों तक वाहन रेंगते रहे और रेलवे स्टेशन पर पैर रखने की जगह नहीं बची। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए यातायात संभाला, वहीं समिति द्वारा स्टेशन पर भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई।
अब 15 मार्च से मिलेगा रुद्राक्ष
समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित ने जानकारी दी कि जो श्रद्धालु इस दौरान रुद्राक्ष प्राप्त नहीं कर सके हैं, उनके लिए 15 मार्च से पुन: रुद्राक्ष वितरण शुरू किया जाएगा। समापन अवसर पर पंडित मिश्रा के पुत्र राघव मिश्रा के भजनों ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर कौशिक महाराज सहित कई संतों और गणमान्य अतिथियों का सम्मान भी किया गया।


