मामा शिवराज के बुदनी-इछावर और आलोक का सीहोर ‘लकी’…

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सीहोर। संसदीय क्षेत्रों के मामले में जिले की चार विधानसभा सीटों के बीच विकास की तुलना अब सडक़ों और चौपालों की बहस का मुख्य मुद्दा बन गई है। जिले का राजनीतिक परिदृश्य फिलहाल दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है। एक तरफ विदिशा और भोपाल संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सीटें लकी साबित हो रही हैं तो दूसरी तरफ देवास संसदीय क्षेत्र में आने वाली आष्टा विधानसभा की जनता खुद को उपेक्षित महसूस कर रही है। जनता का सीधा सवाल है कि जो सक्रियता मामा शिवराज और आलोक शर्मा दिखा रहे हैं, वैसी तड़प आष्टा के लिए क्यों नहीं दिखती।
बता दें विदिशा सांसद और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर साबित किया है कि दिल्ली की बड़ी जिम्मेदारी के बावजूद उनका दिल अपने क्षेत्र के लिए धडक़ता है। उन्होंने अपने जन्मदिन पर बुदनी के भैरुंदा को ‘नि:शुल्क मामा कोचिंग क्लासेस’ की सौगात दी, ताकि निर्धन बच्चों को अफसर बनने के लिए शहर न भागना पड़े। साथ ही बुदनी और इछावर के लिए चलित अस्पताल की घोषणा की, जो ताकि गांव-गांव जाकर ग्रामीणों का मुफ्त इलाज हो सके।
वहीं भोपाल सांसद आलोक शर्मा भी सीहोर विधानसभा क्षेत्र में लगातार पसीना बहा रहे हैं। उनकी सक्रियता का ही परिणाम है कि सीहोर रेलवे स्टेशन को लगातार नई ट्रेनों के स्टॉपेज की सौगात मिल रही है। अभी एक सप्ताह पहले ही सीहोर को दो महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव का तोहफा मिला है, जिससे स्थानीय यात्रियों और व्यापारियों में भारी उत्साह है।
आष्टा की जनता का सवाल, हमें सौगात कब मिलेगी
इन सबके उलट देवास संसदीय सीट के अंतर्गत आने वाली आष्टा विधानसभा क्षेत्र की तस्वीर थोड़ी धुंधली नजर आ रही है। यहां की जनता का कहना है कि सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी ने अब तक ऐसी कोई विशेष सौगात क्षेत्र को नहीं दी है, जिसे मील का पत्थर माना जाए या जिसके लिए जनता उन्हें लंबे समय तक याद रखे।