सीहोर। जिला मुख्यालय पर गुरुवार को महादेव की होली का ऐतिहासिक उत्सव भक्ति और मर्यादा के साथ संपन्न हुआ। अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के सानिध्य में जहां पूरा शहर अबीर-गुलाल और फूलों की वर्षा में डूबा रहा, वहीं उत्सव के तुरंत बाद नगर पालिका के सफाई मित्रों ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा से एक नई मिसाल पेश की। जब शहरवासी होली मनाकर विश्राम कर रहे थे, तब ये स्वच्छता सेनानी सडक़ों पर उतरकर शहर को चकाचक करने में जुटे थे।
नगर पालिका अध्यक्ष विकास प्रिंस राठौर ने सोशल मीडिया के माध्यम से सफाई कर्मचारियों के जज्बे को सलाम किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि आयोजन में हजारों क्विंटल गुलाल और फूलों का उपयोग हुआ, जिससे सडक़ों पर ढेर लग गया था। लेकिन नागरिकों को असुविधा न हो्र इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने तत्काल सफाई कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने भावुक होते हुए लिखा चाहे होली हो या दिवाली, हर परिस्थिति में हमारे स्वास्थ्यकर्मी मोर्चे पर तैनात रहते हैं, इनकी मेहनत को सलाम।
नवाबों की रस्मों की जगह महादेव की होली
बता दें पंडित प्रदीप मिश्रा के नेतृत्व में गुरुवार को पुरानी परंपरा को पुनर्जीवित किया गया है। कभी नवाबों के सामने होली की रस्में निभाने वाले इस शहर ने अब महादेव की भक्ति को आत्मसात कर लिया है। सीवन तट के 108 शिवालयों की मर्यादा के साथ आयोजित इस चल समारोह में न पानी की बर्बादी हुई और न ही हानिकारक रंगों का प्रयोग। केवल फूलों और गुलाल से महादेव का स्वागत किया गया।
चमत्कारेश्वर से मनकामेश्वर तक आस्था का कारवां
होली की यह यात्रा छावनी स्थित चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर गुप्तेश्वर, पिपलेश्वर और नर्मदेश्वर महादेव होते हुए प्राचीन मनकामेश्वर मंदिर पहुंची, यहां भव्य महाआरती के साथ उत्सव का समापन हुआ। पंडित प्रदीप मिश्रा ने भक्तों को संदेश दिया कि महादेव की भक्ति का रंग स्थायी है। उन्होंने सभी से मर्यादा और अनुशासन के साथ पर्व मनाने की अपील की।
सफाई मित्रों ने कायम रखा स्वच्छ का संकल्प
भक्तों के उत्साह और उत्सव की भव्यता के बीच नगर पालिका के अमले ने सुनिश्चित किया कि शहर की सुंदरता बनी रहे। आयोजन के मार्ग पर बिखरे गुलाल और फूलों को युद्धस्तर पर साफ किया गया, जिसकी चर्चा अब पूरे शहर में हो रही है।


