Sehore News : सीहोर। विकास के दावों और लाड़ली बहना योजना की सफलता के नारों के बीच जिले की इछावर विधानसभा से एक विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। प्रदेश की मोहन यादव सरकार में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, जो इसी क्षेत्र से 8वीं बार विधायक हैं, उनके अपने ही क्षेत्र के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। आलम यह है कि प्यास से बेहाल करीब 150 परिवारों ने अपने पुरखों के घरों पर ताले लटका दिए हैं और गांव से पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।
हैरानी की बात यह है कि जिस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व एक कद्दावर नेता पिछले कई दशकों से कर रहे हैं, वहां के ग्रामीण आज भी 2 किलोमीटर दूर से पानी लाने विवश है। ग्राम खामलिया, नरेला, रायपुर, नयाखेड़ा और बड़बेली में जल संकट इतना विकराल हो चुका है कि लोग अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ पानी खरीदने में लुटा रहे हैं।
पानी में बह रही सम्मान निधि
सरकार जिस लाड़ली बहना योजना के जरिए महिलाओं को आर्थिक संबल देने का दावा कर रही है, इछावर की बहनों के लिए वह राशि बेमानी साबित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि एक कुप्पा पानी 05 से 10 रुपये में मिल रहा है। एक परिवार को रोज 100 से 150 रुपये का पानी खरीदना पड़ रहा है। ऐसे में बहनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता सीधे पानी बेचने वालों की जेब में जा रही है।
मंत्रियों के आदेश भी ठंडे बस्ते में
इस संकट को लेकर किसान नेता एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में सरपंचों का प्रतिनिधिमंडल भोपाल के चक्कर काट रहा है। मेवाड़ा का आरोप है कि पीएचई मंत्री सम्पतिया उईके और प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने नलकूप खनन के स्पष्ट निर्देश दिए थे, लेकिन विभाग के कार्यपालन यंत्री और स्थानीय अधिकारी इन आदेशों को ठंडे बस्ते में डाले बैठे हैं। अधिकारियों की इसी लापरवाही के कारण ग्रामीण घर छोडऩे को मजबूर हैं।
मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचा मामला
अधिकारियों की टालमटोल से नाराज ग्रामीण एक बार फिर मुख्यमंत्री निवास पहुंचे। मामला गरमाता देख मुख्यमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया और प्रमुख अभियंता को तत्काल नलकूप खनन के निर्देश दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या 8वीं बार के विधायक और मंत्रीजी के क्षेत्र में जनता की प्यास बुझती है या फिर ग्रामीणों का यह पलायन ही मजबूरी है।


