सीहोर। आस्था और शक्ति की साधना का महापर्व चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 19 मार्च से प्रारंभ होने जा रहा है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का भी शुभारंभ होगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस बार मां दुर्गा का आगमन पालकी पर होगा, जो साधकों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि नवरात्रि का शुभारंभ उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में होगा, जिसका समापन 27 मार्च को रामनवमी के साथ होगा। इस बार पूरे नौ दिनों तक माता के नौ स्वरूपों की आराधना की जाएगी। पर्व के दौरान सर्वार्थसिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, द्विपुष्कर योग और पुष्य नक्षत्र जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं, जो पूजा-अर्चना और नई शुरुआत के लिए अत्यंत फलदायी रहेंगे।
पालकी पर होगा आगमन
पंडित शर्मा के अनुसार वर्ष में चार नवरात्रि होती हैं, जिनमें चैत्र और अश्विन मास की नवरात्रि प्रत्यक्ष होती हैं। इस चैत्र नवरात्रि में माता के नौ स्वरूपों मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की विशेष साधना की जाएगी। उन्होंने बताया कि नवरात्रि में शिव-शक्ति की संयुक्त साधना मानव के समस्त रोगों, दोषों और कष्टों का निवारण करती है।
नववर्ष पर विशेष अनुष्ठान
19 मार्च को हिंदू नववर्ष के पहले दिन मां भगवती की साधना के साथ-साथ रुद्राभिषेक, भगवान सत्यनारायण की कथा और सुंदरकांड का पाठ करना मंगलकारी रहेगा। पंडित सुनील शर्मा ने कहा कि नवरात्रि काल में जप तप और ध्यान करने से साधक का जीवन सुखमय और मंगलमय हो जाता है।


