सीहोर। सिद्धिकगंज थाना अंतर्गत ग्राम धर्मपुरी में शुक्रवार को हुए भाई-बहन के दोहरे हत्याकांड के पीछे की कहानी किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं है। यह वारदात केवल जमीन के विवाद का नतीजा नहीं थी, बल्कि इसमें बदले की आग, सामाजिक बहिष्कार का गुस्सा और प्रशासनिक अनदेखी शामिल हैं। पड़ताल में सामने आया है कि मुख्य आरोपी हरिसिंह मालवीय ने दो दिन पहले ही गांव वालों को चेतावनी दे दी थी कि कुछ ऐसा करूंगा कि पूरा गांव याद रखेगा।
बता दें घटना की पटकथा करीब छह महीने पहले 21 अक्टूबर 2025 को लिखी गई थी, जब हरिसिंह के 23 वर्षीय बेटे की एक सडक़ हादसे में मौत हो गई थी। हरिसिंह इसे हादसा मानने को तैयार नहीं था, उसका शक था कि उसके छोटे भाई जगदीश ने साजिश रचकर उसके बेटे को मरवाया है। वन भूमि के पुराने विवाद ने इस शक को गहरी रंजिश में बदल दिया।
गमी की होली ने चढ़ाया पारा
वारदात से ठीक पहले गमी की होली ने बारूद में चिंगारी का काम किया। परंपरा के अनुसार गमी वाले घर में ग्रामीण रंग डालने पहुंचते हैं, लेकिन हरिसिंह के घर कोई नहीं गया। जब हरिसिंह ने ग्रामीणों से इसका कारण पूछा तो उन्होंने साफ कह दिया जब तुम्हारे बेटे की अंत्येष्टि में आए थे, तब तुमने गाली देकर भगाया था, इसलिए हम नहीं आए। ग्रामीणों की इस बात से तिलमिलाए हरिसिंह ने उसी वक्त पूरे गांव को धमकी दे डाली थी।
खौफ के साये में था पीडि़ता परिवार
इनसाइड स्टोरी में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि मृतक कुलदीप और शीतल का पिता जगदीश पिछले कई महीनों से मौत के साये में जी रहा था। वह हरिसिंह के डर से इतना भयभीत था कि घर से बाहर तक नहीं निकलता था। जगदीश ने पुलिस अधिकारियों को चार बार आवेदन देकर अपनी और परिवार की जान को खतरा बताया था। डर का आलम यह था कि जगदीश राशन दुकान तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। ग्रामीणों ने बताया जा रहा है कि कई बार पुलिस ने खुद उसके घर राशन पहुंचाया था।
भाई-बहन पर यमराज बनकर टूटे अपने
शुक्रवार सुबह जब 18 वर्षीय कुलदीप अपनी 20 वर्षीय बहन शीतल के साथ 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने बाइक से निकला तो उसे क्या पता था कि रास्ते में उसका सगा ताऊ और चचेरा भाई मौत बनकर खड़े हैं। आरोपी हरिसिंह और उसके बेटे हेमंत ने लाठियों से उन पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। कुलदीप की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि भाई को बचाने के चक्कर में शीतल ने भी अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।
आरोपी का घर फूंका, पुलिस से झूमाझटकी
हत्याकांड के बाद गांव में गुस्सा फूट पड़ा। किसी अज्ञात व्यक्ति ने आरोपी हरिसिंह के घर में आग लगा दी, जिसे पुलिस ने समय रहते बुझाया। आक्रोशित परिजनों की पुलिस से तीखी झड़प भी हुई। वर्तमान में दोनों मुख्य आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि स्थिति और न बिगड़े।


