Sehore News: सीहोर। जिला मुख्यालय पर आयोजित होने वाली समय सीमा की बैठकों में कलेक्टर के निर्देश फाइलों और सभागार की दीवारों तक ही सीमित होकर रह गए हैं। जमीनी हकीकत इसके उलट है। जिले में गर्मी की दस्तक के साथ ही खेतों में नरवाई जलाने का सिलसिला बेखौफ जारी है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि आसपास खड़ी गेहूं की फसलें भी खाक हो रही हैं। कृषि विभाग और राजस्व अमले की निष्क्रियता के चलते किसान अपनी साल भर की कमाई को आंखों के सामने जलता देखने को मजबूर हैं।
बता दें कलेक्टर बालागुरू के. द्वारा प्रत्येक टीएल बैठक में कृषि विभाग को सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं कि किसानों को नरवाई न जलाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्हें बताया जाए कि आग लगाने से जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है और मित्र कीट मर जाते हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए जुर्माना लगाने और संयुक्त निगरानी के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद मैदानी अमले ने इन निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। न तो किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाया गया और न ही आग लगाने वालों पर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई की गई।
मार्च महीने में आगजनी का तांडव
सोशल मीडिया और फेसबुक पर हर दिन खेतों में लगती आग के वीडियो और फोटो वायरल हो रहे हैं, जो प्रशासन के दावों की पोल खोल रहे हैं। केवल सीहोर शहर के आसपास के क्षेत्रों पर नजर डालें तो आंकड़े डराने वाले हैं।
27 मार्च: ग्राम थूना खुर्द में फसल के साथ खेत पर बना घर में आग से हुआ खाक
27 मार्च: ग्राम मुंगावली में लगी आग, ग्रामीणों की सतर्कता से टला बड़ा हादसा
24 मार्च: मुगीसपुर डिमार्ट के समीप कबाड़े की दुकान में लगी आग
16 मार्च: बरखेड़ी-हीरापुर के बीच गेहूं की खड़ी फसल में लगी आग
16 मार्च: ग्राम आलपुरा गांव में खेत में लगी भीषण आग
16 मार्च: लसुडिय़ा परिहार में खेतों में लगी आग
15 मार्च: मुल्लानी गांव में लाइट फाल्ट होने से खेत में लगी आग
14 मार्च: ग्राम चांदबड़ में खेतों में लगी आग
12 मार्च: गुड़भेला वेयर हाउस के पीछे सेतोष के खेत में लगी आग, डेढ़ एकड़ की फसल स्वाह
11 मार्च: झागरिया रोड पर गेहूं की खड़ी फसल में लगी आग
09 मार्च: ग्राम निपानियां खुर्द में खड़ी फसल में लगी आग
केवल मुख्यालय का हाल, जिले की तस्वीर और भी भयावह
गौर करने वाली बात है कि उक्त घटनाएं केवल जिला मुख्यालय के आसपास की हैं। सीहोर जिले का विस्तार बुदनी, आष्टा और इछावर विधानसभा क्षेत्रों तक है। यदि इन तीनों विधानसभा क्षेत्रों के ग्रामीण अंचलों के आंकड़े जुटाए जाएं तो आगजनी की यह तस्वीर और भी भयावह नजर आएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में दमकल वाहनों की कमी और कृषि विभाग के अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण किसान भगवान भरोसे हैं।
जनता में डर, प्रशासन बेफिक्र
खेतों में लगती आग से आम जनमानस और किसान डरा हुआ है। एक तरफ जहां किसान अपनी पकी हुई फसल को बचाने के लिए रात.दिन पहरा दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सिस्टम पूरी तरह बेफिक्र नजर आ रहा है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माने का अभाव और वैकल्पिक नरवाई प्रबंधन जैसे रीपर या अन्य मशीनरी के प्रति उदासीनता ने आग में घी डालने का काम किया है।


