Sehore: ई.स्कूटी को आग से बचाना है तो रखें ये ध्यान…

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Sehore News: सीहोर। शहर की सडक़ों पर इन दिनों बैटरी से चलने वाली ई.स्कूटी की भरमार देखने को मिल रही है। शहर में लगभग हर तीसरे हाथ में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन नजर आ रहा है। एक तरफ जहां पेट्रोल के खर्च से राहत मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ देश के अलग-अलग हिस्सों में ई.व्हीकल की बैटरी में आग लगने और ब्लास्ट होने की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सीहोर में भी किसी दिन आगजनी जैसा बड़ा हादसा न हो, इसके लिए समय रहते सही रखरखाव और चार्जिंग के नियमों का पालन करना बेहद जरूरी हो गया है।
मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) भोपाल में हुए एक अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन रीसेम 2026 में विशेषज्ञों ने साफ किया है कि हर हादसे के पीछे बैटरी की खराबी ही वजह नहीं होती। कई मामलों में उपभोक्ताओं की गलत चार्जिंग आदतें, डुप्लीकेट या गैर-मानक चार्जर का इस्तेमाल और लोकल मैकेनिकों से सर्विसिंग कराना मुख्य कारण बनता है।
20 से 80 फीसदी चार्जिंग का नियम अपनाएं
मैनिट के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजीव सिंह के अनुसार ई.स्कूटी की बैटरी लाइफ बढ़ाने और हादसे से बचने के लिए इसे 100 प्रतिशत तक ओवरचार्ज करने या पूरी तरह 0 प्रतिशत डिस्चार्ज होने देने से बचना चाहिए। बैटरी को हमेशा 20 से 80 प्रतिशत के बीच चार्ज रखना सबसे सुरक्षित माना जाता है।
रखें इन बातों का ध्यान
ओरिजिनल चार्जर ही चुनें: हमेशा कंपनी के अधिकृत और असली चार्जर का ही इस्तेमाल करें, लोकल चार्जर से बैटरी गर्म होकर फट सकती है।
अधिकृत सर्विस सेंटर पर भरोसा: किसी भी तकनीकी खराबी या सर्विसिंग के लिए अप्रशिक्षित मैकेनिक की बजाय अधिकृत सर्विस सेंटर का ही रुख करें।
धूप और ओवरहीटिंग से बचाएं: तेज धूप में वाहन चार्ज करने से बचें और राइड के तुरंत बाद गर्म बैटरी को चार्जिंग पर न लगाएं।
भरोसे की कमी सबसे बड़ी चुनौती
भारत सरकार ने 2030 तक कुल वाहनों में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी ई.व्हीकल की करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि मैनिट की रिसर्च के मुताबिक देश में फिलहाल 5 प्रतिशत लोग ही ईवी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत लोग अपने वाहन घर पर ही चार्ज करते हैं। ऐसे में हादसों को रोकने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान और हर जिले में अधिकृत सर्विस सेंटर खोलना बेहद जरूरी है।