सीहोर कृषि कॉलेज में 85 प्रतिशत पद खाली….

02 sehore photo 04

Sehore News: सीहोर। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में शिक्षकों के अकाल ने उच्च शिक्षा और कृषि अनुसंधान की कमर तोडक़र रख दी है। सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति सीहोर स्थित कृषि कॉलेज की है, जहां शिक्षकों के कुल 33 स्वीकृत पदों में से 28 पद खाली पड़े हैं। कॉलेज में महज 5 नियमित शिक्षक कार्यरत हैं, यानी करीब 85 फीसदी पद खाली हैं।
शिक्षकों की इस भारी कमी का सीधा असर कृषि की पढ़ाई कर रहे छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि स्नातकोत्तर पीजी पाठ्यक्रमों में रिसर्च वर्क (अनुसंधान) होता है, जिसके लिए नियमानुसार नियमित शिक्षकों का होना अनिवार्य है। नियमित शिक्षक न होने के कारण सीहोर, मंदसौर और खंडवा के कृषि कॉलेजों में सत्र 2026-27 से एमएससी (कृषि) के कई विषयों में प्रवेश नहीं दिए जाएंगे।
33 में से 28 पद खाली, पढ़ाई रामभरोसे
सीहोर कृषि कॉलेज प्रदेश के पुराने और प्रतिष्ठित कृषि शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है, लेकिन वर्तमान में यह प्रशासनिक अनदेखी का शिकार है। जहां स्वीकृत पद 33 हैं, जबकि कार्यरत महज पांच ही शिक्षक है, इस तरह कुल 28 पद रिक्त हैं। इतने बड़े पैमाने पर पद खाली होने से न केवल दैनिक कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि पीजी स्तर की रिसर्च और प्रायोगिक कार्य भी ठप पडऩे की कगार पर हैं।
पांचों कृषि कॉलेजों का बुरा हाल
विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले अन्य शहरों के कृषि कॉलेजों में भी स्थिति बहुत अलग नहीं है। ग्वालियर, इंदौर, खंडवा, मंदसौर और सीहोर को मिलाकर कुल 129 पद खाली पड़े हैं…खंडवा कॉलेज में स्वीकृत पद 34 हैंं, जबकि कार्यरत महज 03, रिक्त पदों की संख्या 31 हैं, इसी तरह ग्वालियर में स्वीकृत पद 30, कार्यरत 06, रिक्त 24, इंदौर में स्वीकृत 31, कार्यरत 10, रिक्त 21 और मंदसौर में स्वीकृत पद 50, कार्यरत 28 जबकि रिक्त पदों की संख्या 22 हैं।
सेवानिवृत्त शिक्षक भी नहीं आ रहे
खाली पदों को भरने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सेवानिवृत्त शिक्षकों से अनुबंध पर सेवाएं देने के लिए आवेदन मांगे थे। हालांकि मानदेय या अन्य शर्तों के चलते सेवानिवृत्त शिक्षकों ने भी इसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। आवेदन न मिलने के कारण विश्वविद्यालय को आवेदन की अंतिम तिथि 27 जुलाई से बढ़ाकर 5 अगस्त करनी पड़ी है।
छात्र होंगे पलायन को मजबूर
विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि शासन स्तर पर रिक्त पदों को भरने की अनुमति के लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन मंजूरी नहीं मिल पा रही है। विवि के प्रबंध मंडल में कई जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं, लेकिन शिक्षकों के पदों की भर्ती के लिए शासन स्तर पर उनकी ओर से भी ठोस प्रयास नहीं दिख रहे हैं।