Sehore: पं. प्रदीप मिश्रा ने जेन-जी को दी नसीहत…

00

Sehore News: सीहोर। कुबेरेश्वरधाम में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं शिव महापुराण कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा के दौरान कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने देश की नई पीढ़ी जेन-जी और युवाओं को आचरण व भाषा की मर्यादा बनाए रखने की विशेष नसीहत दी। उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के दौरान युवाओं द्वारा इस्तेमाल की जा रही अभद्र भाषा पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां हर नागरिक को अपनी बात रखने और सरकार या किसी भी व्यवस्था का विरोध करने का पूरा अधिकार है। लेकिन विरोध का मतलब अभद्रता या अमर्यादित होना नहीं होता। युवाओं को संस्कारित आचरण की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि विरोध हमेशा मर्यादित भाषा, अनुशासन और गरिमा के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।
जंतर-मंतर की भाषा मर्यादा के खिलाफ
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि वहां जिस तरह की आपत्तिजनक और अभद्र शब्दावली का प्रयोग किया गया, वह भारत की महान संस्कृति और मर्यादा के पूरी तरह खिलाफ है। उन्होंने कहा कि देश का प्रधानमंत्री किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा का हो, वह पद पूरे राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है। उस पद के प्रति अमर्यादित और अभद्र शब्दों का प्रयोग बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। विचारों में असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन उसे जताने का तरीका हमेशा सभ्य, अनुशासित और संस्कारित होना चाहिए।
गुरु बाजार में मिलने वाली चीज नहीं, विश्वास की मूर्ति हैं
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए पंडित मिश्रा ने कहा कि गुरु कोई बाजार में बिकने वाली वस्तु नहीं हैं, बल्कि वे विश्वास और भरोसे की जीवंत मूर्ति होते हैं। गुरु और शिष्य का संबंध सिर्फ और सिर्फ निष्कपट आस्था पर टिका होता है, जो व्यक्ति सादगी के साथ अपने शिष्य को ईश्वर और परमात्मा के मार्ग से जोड़ देए वही सच्चा गुरु कहलाने का अधिकारी है।