Sehore News: सीहोर। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता लाने के नाम पर लागू की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था अब शिक्षकों के लिए भारी जी का जंजाल बन गई है। एक तरफ लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने आदेश जारी किया है कि जिस दिन ऐप पर ई-अटेंडेंस नहीं लगेगी, उस दिन शिक्षक को अनुपस्थित मानकर वेतन काट लिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर विभाग का आधिकारिक हमारे शिक्षक ऐप तकनीकी खामियों और जीपीएस की गड़बडिय़ों से पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रहा है। परिणामस्वरूप शिक्षक रोजाना समय पर स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं, लेकिन ऐप में उपस्थिति दर्ज न होने से उन पर अनधिकृत अनुपस्थिति और वेतन कटौती की तलवार लटक गई है।
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर हमारे शिक्षक ऐप से उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संकुल प्राचार्य केवल ई-अटेंडेंस के आधार पर ही वेतन देयक तैयार करेंगे। यदि बिना ई-अटेंडेंस के वेतन निकाला गया तो इसके लिए संकुल प्राचार्य व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। जिस दिन ऑनलाइन उपस्थिति नहीं होगी, उस दिन का वेतन आहरित नहीं किया जाएगा। इस फरमान के बाद से शिक्षक वर्ग में भय और भारी आक्रोश का माहौल है।
स्कूल परिसर में खड़े शिक्षक, ऐप बता रहा दूर
विभाग का दावा था कि जीपीएस और जियो-फेंंसिंग तकनीक से फर्जी हाजिरी पर रोक लगेगी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। शिक्षक स्कूल के मुख्य गेट पर खड़े होकर हाजिरी लगाने का प्रयास करते हैं, लेकिन ऐप उनकी लोकेशन 4 किलोमीटर से लेकर 6 किलोमीटर तक दूर बता देता है।
शिक्षकों को ऐप पर अजीबोगरीब मैसेज
समाज की दिशा तय करने वाले इन शिक्षकों के लिए यह एप मजाक बनकर रह गया है। गेट पर खड़े शिक्षक को ऐप ने संदेश मिल रहे हैं कि आप 5-6 किलोमीटर दूर हैं, कृपया मुस्कुराएं, सुरक्षा के लिए आवश्यक है। चेहरा नहीं मिलाए सिर बाईं ओर घुमाएं। सिर ऊपर करें आदि मैसेज दे रहा है।
नेटवर्क और सर्वर में उलझी अटेंडेंस
शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क और सर्वर की भारी समस्या है। कई बार सुबह लॉगिन तो हो जाता है, लेकिन शाम को लॉगआउट दर्ज नहीं हो पाता। लॉगआउट न होने पर भी सिस्टम शिक्षक को पूरे दिन अनुपस्थित दिखा देता है। इसके अलावा कैजुअल लीव मेडिकल, ऑन ड्यूटी और ट्रेनिंग जैसी अर्जियों के लिए भी शिक्षक इसी ऐप पर निर्भर हैं, लेकिन ऐप क्रैश होने से पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। अतिथि शिक्षकों के लिए भी 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस अनिवार्य की गई है, जिससे उनकी नौकरी पर संकट मंडरा रहा है।
कटेगा वेतन तो बिगड़ेगा परिवार का बजट
शिक्षकों का कहना है कि जब गलती विभाग के सॉफ्टवेयर और ऐप की है तो उसकी सजा शिक्षकों को वेतन कटौती के रूप में क्यों दी जा रही है। शिक्षकों का तर्क है कि नई डिजिटल प्रणाली को लागू करने से पहले शिक्षकों को कोई व्यावहारिक प्रशिक्षण नहीं दिया गया। शिक्षक भले ही ऐप में अनुपस्थित दिख रहे हों, लेकिन स्कूल के ऑफलाइन उपस्थिति रजिस्टर और पोर्टल पर दर्ज अन्य ऑनलाइन कार्यों से उनकी उपस्थिति साबित होती है। अधिकांश शिक्षकों ने गृह ऋण या वाहन ऋण ले रखा है। वेतन रुकने या कटने से बच्चों की फीस, मकान किराया, दवाइयों का खर्च और परिवार का बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा।
तकनीकी सुधार होने तक रोकें आदेश
पीडि़त शिक्षकों ने मांग की है कि जब तक ऐप की तकनीकी त्रुटियां और जीपीएस लोकैशन की समस्या पूरी तरह ठीक नहीं हो जाती, तब तक वेतन कटौती वाले आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। साथ ही जब तक डिजिटल सिस्टम सुचारू नहीं होता तब तक स्कूल के मूल उपस्थिति रजिस्टर से दर्ज हाजिरी को ही वेतन भुगतान का आधार माना जाए।


