Sehore News: सीहारे। एक तरफ जहां नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और राज्य शासन के सख्त निर्देश हैं कि मानसून के दौरान नदियों से रेत का उत्खनन पूरी तरह प्रतिबंधित जारी है, वहीं दूसरी तरफ जिले के बुधनी क्षेत्र में खनन माफिया बेखौफ होकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। एनजीटी के आदेशों और प्रशासनिक दावों की पोल खोलती एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां आंबा बडग़ांव स्थित नर्मदा नदी के बीचों-बीच अवैध रेत भरने गया एक पूरा डंपर गहरे पानी में डूब गया।
जानकारी के अनुसार आंबा बडग़ांव के तटों पर बिना किसी स्वीकृत खदान के रात-दिन अवैध रेत का उत्खनन किया जा रहा है। इसी दौरान नदी के भीतर से रेत लोड करने उतरा एक डंपर पानी की गहराई और तेज बहाव की चपेट में आ गया और सीधे नर्मदा नदी में समा गया। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन नर्मदा के गहरे पानी में डूबते इस डंपर की तस्वीरों ने क्षेत्र में चल रहे अवैध उत्खनन के काले कारोबार को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
क्या हैं एनजीटी के नियम
- – हर साल मानसून सीजन के दौरान 10 जून से 15 अक्टूबर या 1 जुलाई से 30 सितंबर तक राज्य के मानसून चक्र के अनुसार नदियों से किसी भी प्रकार के बालू या रेत के उत्खनन पर पूरे देश में पूर्ण प्रतिबंध रहता है।
- – बारिश का मौसम नदियों के जलीय जीवों मछलियों, कछुओं आदि के प्रजनन का समय होता है। इसके अलावा भारी मशीनों या पनडुब्बियों के इस्तेमाल से नदी के प्राकृतिक प्रवाह, तटों के कटाव होता है, जिससे नदी के अस्तित्व को नुकसान पहुंचता है।
- – नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए पानी के भीतर पनडुब्बी, पोकलेन या हैवी मशीनों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
प्रशासनिक अमले की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल
हैरानी की बात यह है कि यह पूरा घटनाक्रम केंद्रीय कृषि मंत्री और क्षेत्रीय सांसद शिवराज सिंह चौहान के गृह क्षेत्र का है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जिन स्थानों पर कोई वैध खदान स्वीकृत भी नहीं है, वहां भी माफिया बेखौफ होकर नर्मदा के सीने को चीर रहे हैं। दिन-रात सैकड़ों डंपर और भारी पोकलेन मशीनें नर्मदा तटों पर सक्रिय हैं, लेकिन पुलिस, खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मौन साधे बैठा है।


