Sehore: न सिस्टम सुन रहा, न जिले के किसान मानने को तैयार…

04 sehore photo 02

Sehore News: सीहोर। न सिस्टम सुन रहा है और न ही जिले के किसान अब हार मानने को तैयार हैं। प्रदेश सरकार के वरिष्ठ राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के गृह जिले सीहोर के ग्राम बड़वेली में झूलते 11 केवी बिजली के तारों से हुए भीषण हादसे ने अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले लिया है। अपने ही क्षेत्र के मंत्री और जिला प्रशासन की अनदेखी से आक्रोशित किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। सीहोर के कलेक्टर दफ्तर से शुरू हुआ यह आक्रोश अब भोपाल में मुख्यमंत्री निवास, ऊर्जा मंत्री के बंगले और गोविंदपुरा एमडी दफ्तर तक पहुंच चुका है।
बता दें ग्राम बड़वेली और आसपास के इलाकों में सालों से खेतों के ऊपर 11 केवी लाइन के तार खतरनाक तरीके से झूल रहे हैं। किसानों का आरोप है कि बिजली विभाग की घोर लापरवाही के कारण अब तक 5 किसान करंट की चपेट में आ चुके हैं, जिनमें से 3 की मौत हो चुकी है, जबकि हाल ही में सतीश मेवाड़ा नामक किसान का हाथ काटना पड़ा। इसके अलावा आए दिन मवेशियों की मौत और फसलों में आग लगने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
समाजसेवी मेवाड़ा के नेतृत्व में आर-पार की जंग
क्षेत्रीय किसान और समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में करीब 25 से अधिक गांवों के किसान एकजुट हो चुके हैं। किसानों की स्पष्ट मांगे हैं कि पीडि़त किसान सतीश मेवाड़ा को 25 लाख का मुआवजा दिया जाए। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले। लापरवाही बरतने वाले बिजली विभाग के दोषी अफसरों पर कड़ी विभागीय व कानूनी कार्रवाई हो।
मंत्री और अफसरों के आदेश भी बेअसर
किसानों का प्रतिनिधिमंडल अपनी फरियाद लेकर भोपाल पहुंचा। ऊर्जा मंत्री के बंगले का घेराव करने पर मंत्री ने स्वयं बिजली कंपनी के एमडी को फोन कर सख्त निर्देश दिए। वहीं सीहोर जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने भी पीडि़त को मुआवजा और दोषियों पर कार्रवाई के लिखित निर्देश जारी किए। यहां तक कि विद्युत सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट में भी बिजली वितरण केंद्र बिजोरी, खजूरी कला और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई है और दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। इसके बावजूद कोई फर्क नहीं पड़ा।
मानवाधिकार और महिला आयोग के हस्तक्षेप से मंचा हडक़ंप
जब प्रशासन और विभाग ने अनदेखी की, तब संवैधानिक आयोगों ने मामले में कड़ा रुख अपनाया है। बताया जा रहा है कि मीडिया रिपोर्टों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए मप्र मानवाधिकार आयोग ने गोविंदपुरा स्थित बिजली कंपनी के प्रबंध संचालक से 31 जुलाई तक निष्पक्ष जांच रिपोर्ट तलब की है। मप्र महिला आयोग ने भी राजस्व आयुक्त को जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और पीडि़त परिवार को तुरंत न्याय दिलाने का निर्देश दिया है।
विधानसभा से संसद तक गूंजेगा मामला
किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक मांगेें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन खत्म नहीं होगा। किसानों ने क्षेत्र के विधायकों और सांसदों से इस गंभीर मुद्दे को विधानसभा और संसद के दोनों सदनों में उठाने की अपील की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो सीहोर के साथ-साथ भोपाल, शाजापुर और उज्जैन समेत कई जिलों के हजारों किसान राजधानी भोपाल पहुंचकर सरकार के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन करेंगे।