Sehore News: सीहोर। जिले में बीते डेढ़ सप्ताह से थमी बारिश का एक बार फिर दौर शुरू हो गया है। बीते 24 घंटों के दौरान जिले में औसतन 56.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। इस झमाझम बारिश से जहां आमजन को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिली है, वहीं खेतों में खड़ी सोयाबीन, मक्का और धान की फसलों को नया जीवन मिल गया है।
जिले के सभी 8 वर्षामापी केंद्रों पर अच्छी वर्षा हुई। सबसे ज्यादा बारिश बुधनी में 114.0 मिमी यानी 4.48 इंच दर्ज की गई। इसके बाद रेहटी में 84.2 मिमी यानी 3.31 इंच, नसरुल्लागंज में 68.0 मिमी यानी 2.67 इंच और इछावर में 65.0 मिमी यानी 2.55 इंच बारिश हुई। वहीं श्यामपुर में 52.5 मिमी यानी 2.06 इंच, जिला मुख्यालय सीहोर में 35.0 मिमी यानी 1.37 इंच, आष्टा में 20.0 मिमी यानी 0.78 इंच और जावर में 16.0 मिमी यानी 0.62 इंच वर्षा दर्ज की गई। 1 जून से अब तक जिले में कुल 431.4 मिमी यानी 16.98 इंच वर्षा हो चुकी है। जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक जिले में 451.1 मिमी यानी 17.75 इंच बारिश हुई थी। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बारिश से सोयाबीन और धान की फसलों को सीधा फायदा मिलेगा। नदी-नालों में भी पानी की आवक बढऩे से जलस्तर ऊपर आया है। मौसम विभाग ने अगले 2 दिन भी जिले में मध्यम से तेज बारिश की संभावना जताई है।
24-25 जुलाई को भारी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार आज 22 और कल 23 जुलाई को जिले में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं, जबकि 24 और 25 जुलाई को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग ने 25 जुलाई के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, वहीं 23 और 24 जुलाई को कुछ क्षेत्रों में यलो और औरेंज अलर्ट की स्थिति भी बताई गई है। आरएके कृषि महाविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक एसएस तोमर के अनुसार क्षेत्र में घने बादलों का जमावड़ा बना रहेगा।
14 साल में 8 बार औसत से ज्यादा, 6 बार कम
सीहोर जिले में बीते 14 साल के बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो मौसम में उतार-चढ़ाव का ट्रेंड देखने को मिला है। जिले की औसत वार्षिक बारिश 1148.4 मिलीमीटर है। वर्ष 2012 से 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार 8 साल में बारिश औसत से अधिक दर्ज की गई, जबकि 6 साल में बारिश औसत से कम रही। वर्ष 2020 में सबसे अधिक 1773.1 मिमी बारिश दर्ज की गई, वहीं 2018 में सबसे कम। वर्ष 2014, 2017 और 2022 में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई, जबकि 2015, 2018ए 2019 और 2023 जैसे साल में औसत से कम बारिश रही। आंकड़े बताते हैं कि जिले में बारिश का कोई निश्चित पैटर्न नहीं है, कभी अतिवृष्टि तो कभी अल्पवृष्टि की स्थिति बनती रही है। हालांकि पिछले कुछ सालों में औसत के आसपास बारिश का रुझान बना हुआ है।
बीते दस साल में बारिश की स्थिति
बीते 10 सालों के बारिश के आंकड़े पर बात करें तो भू अभिलेख शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार साल 2012 में 1172.8, 2013 में 1359.8, 2014 में 1538.2, 2015 में 972.0, 2016 में 1138.7, 2017 में 1446.0, 2018 में 870.1, 2019 में 906.6, 2020 में 1773.1, 2021 में 1066.0, 2022 में 1545.7, 2023 में 1043.3, 2024 में 1267.2 और 2025 में 1128.4 एमएम दर्ज की गई।


