Sehore News: सीहोर। जिले के सातदेव स्थित नर्मदा नदी में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान टैंकरों से 11 हजार लीटर दूध अर्पित किए जाने के चर्चित मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि नदियों में दूध चढ़ाना लोगों की धार्मिक आस्था का विषय है और वर्तमान में आस्था पर रोक लगाने का ऐसा कोई कानून नहीं है, इसलिए इस पर सीधे प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। हालांकि अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि इतनी बड़ी मात्रा में नदी में दूध बहाना पर्यावरण की दृष्टि से कतई उचित नहीं है और भविष्य में ऐसे कदमों से बचना चाहिए।
एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच भोपाल के न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने इस याचिका का निपटारा करते हुए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़े निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भविष्य में होने वाले ऐसे धार्मिक आयोजनों पर सतर्क निगरानी रखे। साथ ही स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करे कि नदी में इतनी बड़ी मात्रा में दूध न बहाया जाए।
बहती नर्मदा में जल गुणवत्ता पर नहीं पड़ा बुरा असर
मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त समिति ने अपनी वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि वैज्ञानिक परीक्षणों और आकलन के अनुसार नर्मदा के बहते जल में दूध प्रवाहित करने से पानी की गुणवत्ता पर कोई गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पडऩे के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं।
जांच समिति ने इसका कारण नदी के निरंतर बहते प्रवाह, पानी की अधिक डायल्यूशन क्षमता (घोलने की क्षमता), प्राकृतिक आत्म शुद्धिकरण और हवा के संपर्क से पानी में ऑक्सीजन के लगातार घुलने को बताया। हालांकि समिति ने यह भी माना कि दूध एक जैविक पदार्थ है, जिसके विघटन के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इसलिए किसी भी जल स्रोत में एक साथ बहुत सारा दूध डालना पर्यावरण के लिए ठीक नहीं है।
चिन्हित घाटों पर ही हों धार्मिक आयोजन
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त समिति ने भविष्य के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं कि नर्मदा तट पर होने वाले बड़े धार्मिक आयोजन केवल स्थानीय प्रशासन की पूर्व अनुमति से ही आयोजित किए जाएं। पूजा अर्चना के लिए प्रशासन द्वारा चिन्हित घाटों का ही उपयोग किया जाए। आयोजनों के दौरान कचरा प्रबंधन और पूजा सामग्री के अलग संग्रहण तथा साफ सफाई के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि नदी का जल दूषित न हो।
क्या था पूरा मामला
बता दें जिले के भेरूंदा क्षेत्र स्थित ग्राम सातदेव के दादाजी दरबार पातालेश्वर महादेव मंदिर परिसर में 21 दिनों का विशाल धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया था। इस आयोजन के समापन पर 9 अप्रैल 2026 को श्रद्धालुओं द्वारा टैंकरों के माध्यम से करीब 11 हजार लीटर दूध नर्मदा नदी में विसर्जित किया गया था। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद नदी के जल को दूषित करने और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर सवाल खड़े हो गए थे, जिसके बाद यह मामला एनजीटी पहुंचा था।


