Sehore News: सीहोर। डाक विभाग और ग्रामीण डाक सेवक कर्मचारियों की वर्षों से लंबित समस्याओं को लेकर डाककर्मियों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। अपनी 9 सूत्रीय मांगों के समर्थन में कर्मचारियों ने मंगलवार को हाथों में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों ने केंद्र सरकार और डाक विभाग के उच्च अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग में टारगेट पूरा करने के नाम पर कर्मचारियों का मानसिक और आर्थिक शोषण किया जा रहा है, जिसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
कर्मचारियों ने कहा कि विभागीय और जीडीएस कर्मचारियों की नियुक्ति डाकघर और रेल डाक सेवा कार्यालयों में अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए होती है, न कि गली-गली घूमकर व्यावसायिक योजनाओं के टारगेट पूरे करने के लिए। वर्तमान में स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि कई कर्मचारियों को अपने वेतन से पैसे खर्च करके खाते खुलवाने पड़ रहे हैं। इससे उनका भारी आर्थिक और मानसिक उत्पीडऩ हो रहा है।
डाककर्मियों की 9 सूत्रीय प्रमुख मांगें
- व्यावसायिक टारगेट के नाम पर कर्मचारियों का शोषण पूरी तरह बंद किया जाए।
- डाक परिवहन के लिए निजी एजेंसियों के बजाय पुन: रेल डाक सेवा को प्रभावी बनाया जाए और बंद किए गए आरएमएस अनुभागों को फिर से शुरू किया जाए, ताकि सरकारी धन भारतीय रेल को मिले।
- मेल मोटर सेवा और सिविल विंग के सभी खाली पदों पर तुरंत भर्ती की जाए।
- विभाग में बढ़ रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर कठोर कार्रवाई हो तथा यूनियन प्रतिनिधियों से इस संबंध में संवाद किया जाए।
- मुंबई विदेश डाकघर में लागू पदोन्नति एवं स्ैळ कैडर संबंधी सुविधाएं दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता के विदेश डाकघरों में भी लागू की जाएं।
- पोस्टल अकाउंट्स के विकेंद्रीकरण पर रोक लगे और एमएमएस पोस्टल अकाउंट्स का कैडर पुनर्गठन किया जाए।
- पूर्व सैनिक कोटे से भर्ती कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए।
- 5 प्रतिशत की सीमा के कारण विभागीय नियुक्ति से वंचित मृतक आश्रितों को जीडीएस के रिक्त पदों पर समायोजित किया जाए तथा एनडीसी-आईडीसी प्रणाली समाप्त कर पुराना डिलीवरी सिस्टम बहाल हो।
- 17 सितंबर भगवान विश्वकर्मा जयंती को राष्ट्रीय श्रम दिवस घोषित किया जाए।
मांगें न मानने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन वाजिब और 9 सूत्रीय मांगों पर शीघ्र सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो वे चरणबद्ध तरीके से बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन की स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी असुविधा की पूरी जिम्मेदारी डाक विभाग और केंद्र सरकार की होगी।


