Sehore: सीहोर। दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव को बेहद गंभीरता से लड़ रही है, जिसे देखते हुए प्रदेश नेतृत्व ने सीहोर के कद्दावर भाजपा नेता और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जसपाल सिंह अरोरा को एक बड़ी और अहम जिम्मेदारी सौंपते हुए दतिया के चुनावी मैदान में उतारा है।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की जमकर चर्चा है कि जसपाल सिंह अरोरा सीहोर जिले के पहले ऐसे भाजपा नेता हैं, जिन्हें पार्टी ने दतिया उपचुनाव में मोर्चेबंदी के लिए भेजा है। सार्वजनिक तौर पर यह पहली जानकारी सामने आई है कि सीहोर से किसी नेता को दतिया चुनाव की कमान सौंपी गई है और इस सूची में अरोरा का नाम सबसे ऊपर है।
अरोरा के सांगठनिक अनुभव का असर
जसपाल सिंह अरोरा सीहोर जिला पंचायत और सीहोर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं, जबकि उनकी धर्मपत्नी अमिता सिंह भी सीहोर नगर पालिका की अध्यक्ष रही हैं। सिख समुदाय के एक बड़े चेहरे के रूप में पहचान रखने वाले अरोरा को संगठन में चुनावी प्रबंधन का माहिर खिलाड़ी माना जाता है। क्योंकि भाजपा दतिया उपचुनाव में हर एक कदम फूंक फूंक कर रख रही है्र ऐसे में अरोरा जैसे कद्दावर और अनुभवी नेता पर जताए गए इस भारी विश्वास की चर्चा पूरे जिले में है। उनके बढ़ते राजनीतिक कद को देखते हुए ही पार्टी ने उन्हें सीधे दतिया में चुनावी कमान संभालने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद वे दतिया पहुंच भी चुके हैं। सीहोर से रवाना होते समय उनके समर्थकों ने उत्साह के साथ विजयश्री के नारे लगाकर उन्हें विदा किया।
तिवारी को मिलेगा अरोरा के अनुभव का लाभ
दतिया में इस समय उपचुनाव की सरगर्मियां चरम पर हैं, जहां मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है। भाजपा ने यहां से आशुतोष तिवारी को अपना आधिकारिक प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जसपाल सिंह अरोरा को दतिया के मैदान में उतारने से भाजपा को जमीनी स्तर पर बड़ा लाभ मिलेगा। उनके सांगठनिक कौशल और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की कला का सीधा फायदा पार्टी प्रत्याशी को मजबूत स्थिति में लाने में मिलेगा।


