सीहोर। जिले में मानसून की रफ्तार धीमी पडऩे से अन्नदाताओं की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। पहले तेज बारिश के कारण बोवनी प्रभावित हुई थी्र जिसके चलते कई किसानों को दो से तीन बार तक दोबारा बोवनी करनी पड़ी। अब जब खेतों में फसलें लहलहाने लगी थीं तो बारिश की लंबी खेंच ने किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। पिछले एक सप्ताह से तेज बारिश नहीं होने के कारण खेतों में दरारें पडऩे लगी हैं और सोयाबीन, मक्का सहित अन्य फसलें पानी के अभाव में मुरझाने लगी हैं।
आरएके कृषि कॉलेज के मौसम वैज्ञानिक डॉ. सत्येंद्र सिंह तोमर के अनुसार मानसून ट्रफ के हिमालय की तलहटी की ओर खिसकने और बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कमजोर पडऩे से बारिश का दौर थमा हुआ है। जिले में 17 जुलाई तक तेज बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि 17 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी में एक नया सिस्टम सक्रिय होने की उम्मीद है, जिससे सीहोर और भोपाल संभाग में फिर से मध्यम से तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
फलों पर मंडराया संकट, दवा का छिडक़ाव भी अटका
बारिश रुकने से खेतों में नमी लगातार कम हो रही है्र जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित हो रही है और कुछ स्थानों पर फसलों के पीले पडऩे की आशंका बढ़ गई है। किसानों के सामने इस समय कीट एवं खरपतवार नियंत्रण के लिए दवा छिडक़ाव का काम भी अटक गया है। यदि आगामी दो-चार दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसलों के सूखने का खतरा काफी बढ़ जाएगा। जिले में खरीफ फसलों का कुल रकबा 4 लाख 7 हजार हेक्टेयर से अधिक है, जिसमें से अब तक 3 लाख 92 हजार 300 हेक्टेयर (करीब 96 प्रतिशत) क्षेत्र में बोवनी पूरी हो चुकी है।
इंद्रदेव को मनाने कर रहे जतन
बारिश न होने और उमस बढऩे से परेशान ग्रामीण और किसान अब भगवान की शरण में पहुंच गए हैं। जिले के ग्रामीण अंचलों में बारिश के लिए पारंपरिक उपाय, टोने-टोटके और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना व यज्ञ शुरू कर दिए गए हैं, ताकि रूठे इंद्रदेव को मनाया जा सके।
पिछले साल के मुकाबले कम बरसे बदरा
भू अभिलेख शाखा के अनुसार जिले की औसत वार्षिक बारिश 1148.4 मिलीमीटर मानी जाती है। इस वर्ष 1 जून से अब तक जिले में केवल 354.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 423.1 मिलीमीटर बारिश हो चुकी थी।
तहसीलवार बारिश का आंकड़ा
सीहोर: इस बार 323.8, पिछले साल 388.9
श्यामपुर: इस बार 196.7, पिछले साल 262.0
आष्टा: इस बार 490.0, पिछले साल 360.3
जावर: इस बार 373.0, पिछले साल 274.0
इछावर: इस बार 429.0, पिछले साल 372.3
भैरुंदा: इस बार 389.0, पिछले साल 481.0
बुदनी: इस बार 290.7 पिछले साल 625.7
रेहटी: इस बार 347.2, पिछले साल 622.0
अभी कुएं या ट्यूबवेल से सिंचाई करने से बचें
जिन खेतों में गहरी जुताई हुई है, वहां फसलों की स्थिति अभी बेहतर है। किसानों को सलाह है कि वे घबराएं नहीं और अभी ट्यूबवेल या कुएं के पानी से सीधे भारी सिंचाई करने से बचें। यदि सिंचाई के तुरंत बाद तेज बारिश हो गई तो पौधे पीले पडक़र खराब हो सकते हैं। किसान दो.चार दिन बारिश का इंतजार करें। यदि फिर भी बारिश नहीं होती है, तो स्प्रिंकलर से हल्की सिंचाई की जा सकती है।
दीपक कुशवाह, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र सेवनिया
समय पर बारिश हुई तो होगा बड़ा फायदा
जिले में 96 प्रतिशत बोवनी का कार्य पूरा हो चुका है और धान की रोपाई का काम अभी भी जारी है। वर्तमान स्थिति में फसल ठीक है, कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। यदि समय पर यानी अगले 2-3 दिनों में बारिश हो जाती है तो फसलों को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि इससे संजीवनी मिलेगी।
एके उपाध्याय, डीडीए कृषि विभाग सीहोर


