Sehore: डीएनए रिपोर्ट ने दिलाई हैवानियत की सजा…

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Sehore News: सीहोर। दो साल पहले एक नाबालिग मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट स्मृता सिंह ठाकुर की अदालत ने पड़ोसी दरिंदे को दोषी करार देते हुए मरते दम तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में सबसे बड़ी भूमिका वैज्ञानिक साक्ष्यों की रही, जहां पुलिस की सजगता से तैयार कराई गई डीएनए रिपोर्ट ने आरोपी के झूठ का पर्दाफाश कर उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
अभियोजन के अनुसार यह घटना 26 जुलाई 2024 की है। पीडि़ता की मां ने कोतवाली थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि दोपहर करीब चार बजे नाबालिग बच्ची घर के पास बने शौचालय में गई थी, तभी पड़ोस में रहने वाला आरोपी तुलसीराम कुशवाहा वहां पहुंचा और मासूम को जबरन अपने घर के भीतर खींच ले गया। अदालत में पेश साक्ष्यों के अनुसार हैवानियत पर उतरे आरोपी ने अंदर से दरवाजा बंद कर मासूम के दोनों पैरों को रस्सी से जकड़ दिया और उसके साथ बलात्कार किया।
बुआ को देख भागा आरोपी
इस असहनीय दर्द और दहशत के बीच भी मासूम ने हिम्मत नहीं हारी। उसने खुद को बचाने के लिए पूरी ताकत से आरोपी को लात मारी और जोर जोर से चीखना शुरू कर दिया। बच्ची की चीख पुकार सुनकर पास ही मौजूद उसकी बुआ तुरंत मौके पर पहुंच गईं और उसे दरिंदे के चंगुल से छुड़ाया। बुआ को सामने देख आरोपी तुलसीराम घबरा गया और वहां से भागने लगा। भागते समय भी उसने पीडि़ता धमकी दी कि यदि किसी को बताया तो वह जान से मार डालेगा।
ऐसे मैच हुआ आरोपी का डीएनए
घटना के तुरंत बाद हरकत में आई कोतवाली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वैज्ञानिक तरीके से सबूत जुटाए। विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी तुलसीराम का ब्लड सैंपल लिया और डीएनए जांच के लिए भेजा। प्रयोगशाला से आई डीएनए रिपोर्ट पीडि़ता के नमूनों से पूरी तरह मैच हो गई्र जिससे यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो गया कि वारदात को तुलसीराम ने ही अंजाम दिया था। इस साक्ष्य के आगे आरोपी का हर बहाना धरा का धरा रह गया।
14 गवाहों के हुए बयान, दी सजा
पुलिस ने विवेचना पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं, पॉक्सो एक्ट और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत अदालत में आरोप पत्र पेश किया था। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 14 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। दस्तावेजी गवाहों और डीएनए रिपोर्ट के आधार पर विशेष न्यायाधीश ने आरोपी तुलसीराम को दोषी पाया। कोर्ट ने आरोपी को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही कुल 4700 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। शासन की ओर से इस मामले में विशेष लोक अभियोजक आशीष त्यागी और रेखा यादव ने प्रभावी पैरवी की।