Sehore News: सीहोर। वर्ष 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को लेकर सीहोर शहर में अभी से राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सीहोर नगर पालिका परिषद के वर्तमान कार्यकाल के लगभग चार साल पूरे होने को हैं और इसी बीच शहर के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के नेताओं ने नपा अध्यक्ष पद की सीट को इस वर्ग के लिए आरक्षित करने की मांग बुलंद कर दी है। इस सिलसिले में जल्द ही एक बड़ा आंदोलन और रणनीति तैयार की जा रही है।
सीहोर शहर की राजनीति में सक्रिय अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के नेताओं का दावा है कि सीहोर नगर पालिका के इतिहास में आज तक कभी भी अध्यक्ष पद की सीट एससी या एसटी वर्ग के खाते में नहीं आई है। नेताओं का कहना है कि सीहोर शहर में एससी और एसटी वर्ग के लोग बहुत बड़ी संख्या में निवास करते हैं। शहर के विकास और आबादी में इस वर्ग की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। इसके बावजूद हर चुनाव में इस वर्ग को नेतृत्व करने के मौके से वंचित रहना पड़ा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर वर्ग को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, इसलिए आगामी चुनाव में इस सीट पर हमारा हक बनता है।
चुनाव आयोग से मिलेगा सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल
अपनी इस मांग को मजबूती से शासन और प्रशासन के सामने रखने के लिए एससी-एसटी वर्ग ने एक अनोखी पहल की है। बताया जा रहा है कि इस मांग को लेकर किसी एक पार्टी के नहीं, बल्कि सभी राजनीतिक दलों भाजपा, कांग्रेस, बसपा, आप व अन्य के एससी-एसटी नेता एकजुट हो गए हैं। जल्द ही इस वर्ग का एक संयुक्त और सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के आला अधिकारियों से मुलाकात करेगा। यह प्रतिनिधिमंडल आयोग को जनसंख्या के आंकड़े और ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए एक ज्ञापन सौंपेगा, जिसमें साल 2027 के चुनाव के लिए सीहोर नगर पालिका अध्यक्ष पद की सीट को एससी या एसटी वर्ग के लिए आरक्षित करने की आधिकारिक मांग की जाएगी।
2027 के चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा असर
वर्तमान परिषद का कार्यकाल अब अंतिम दौर में बढ़ रहा है, ऐसे में इस नई मांग ने शहर के अन्य राजनेताओं की भी धडक़नें बढ़ा दी हैं। यदि चुनाव आयोग और सरकार के स्तर पर इस मांग पर गंभीरता से विचार होता है तो सीहोर शहर के आगामी चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। फिलहाल एससी-एसटी वर्ग के नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे अपने इस राजनैतिक और सामाजिक हक की लड़ाई को अंतिम स्तर तक लड़ेंगे।


