Sehore News: सीहोर। श्यामपुर तहसील के ग्राम निवारिया में जमीन के एक विवाद को लेकर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम श्यामपुर की रहने वाली पीडि़त महिला रामकुंवर भाटी ने राजस्व अमले पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके पास जमीन के पक्के मालिकाना दस्तावेज होने, लिखित आपत्ति दर्ज कराने और कलेक्टर से शिकायत करने के बावजूद अधिकारियों ने उनकी जमीन पर दूसरे पक्ष को जबरन कब्जा दिलवा दिया। पीडि़त महिला ने इसे अपने साथ सरेआम अन्याय बताते हुए शासन-प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार लगाई है।
महिला का आरोप है कि दूसरे पक्ष के हक में राजस्व न्यायालय से जो आदेश जारी हुआ था, उसकी आड़ लेकर उनकी निजी जमीन पर कब्जा दिलाने का यह खेल रचा गया। रामकुंवर भाटी ने बताया कि वे संबंधित अदालती प्रकरण में पक्षकार तक नहीं थीं। उन्हें राजस्व विभाग द्वारा न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का कोई मौका मिला। दूसरे पक्ष ने कथित तौर पर गलत तरीके से जमीन का बंटवारा और सीमांकन करवाया और उसी को आधार बनाकर राजस्व अमले ने यह पूरी एकतरफा कार्रवाई कर डाली।
कलेक्टर की जांच लंबित, दिखाई जल्दबाजी
मामले के घटनाक्रम के अनुसार बीते 19 जून को जब राजस्व निरीक्षक और हल्का पटवारी मौके पर कार्रवाई करने पहुंचे थे, तब महिला ने लिखित आपत्ति दर्ज कराते हुए अपनी रजिस्ट्री और अन्य सभी जरूरी कागजात अधिकारियों के सामने पेश किए थे। दस्तावेज देखने के बाद अधिकारियों ने उस दिन की कार्रवाई को रोक दिया था और मौके पर एक पंचनामा भी बनाया था। इसके बाद न्याय की उम्मीद में पीडि़ता ने 23 जून को कलेक्टर को भी एक लिखित शिकायती आवेदन सौंपकर पूरे मामले की जांच की मांग की थी, जो कि अभी जिला प्रशासन के पास विचाराधीन है। महिला का कहना है कि जब मामला कलेक्टर की जांच के अधीन था, तब अचानक 3 जुलाई को राजस्व का अमला मौके पर पहुंचा और उनकी सभी आपत्तियों व दस्तावेजों को किनारे रखकर दूसरे पक्ष को जमीन सौंप दी।
निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो जाएंगी उच्च न्यायालय
इस एकतरफा कार्रवाई से आहत रामकुंवर भाटी ने मुख्यमंत्री, संभाग आयुक्त और जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए कि आखिर किसके दबाव में आकर बिना सुनवाई के ऐसा कदम उठाया गया। महिला ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही उन्हें न्याय नहीं दिलाया, तो वे मामले को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के पास और सक्षम उच्च न्यायालय की शरण में जाने को मजबूर होंगी।


