Sehore: अब युवराज नहीं, अधिराज है जंगल का राजा…

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सीहोर। जिले की सीमा से सटे देवास जिले के खिवनी अभ्यारण्य से दिलचस्प नियम सामने आया है। जंगल के सिंहासन को लेकर दो शक्तिशाली बाघों के बीच हुए भीषण खूनी संघर्ष के बाद खिवनी का राजा बदल गया है। पिछले एक दशक से इस पूरे इलाके पर एकछत्र राज कर रहा 10 वर्षीय अल्फा मेल टाइगर युवराज इस जंग में बुरी तरह हार गया है। वहीं 4.5 साल के नए युवा बाघ अधिराज ने उसे हराकर जंगल की पूरी सल्तनत अपने नाम कर ली है।
अभ्यारण्य प्रबंधन से मिली जानकारी के मुताबिक इस भीषण लड़ाई में बूढ़े हो रहे युवराज के पंजों और शरीर पर गहरे घाव हो गए। जंग हारने के बाद जब वह अपने ही इलाके में लडख़ड़ाता हुआ और दर्द से कराहता हुआ दिखाई दिया तो वन कर्मियों ने इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही शनिवार को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल की एक्सपर्ट टीम और वन्यजीव डॉक्टर तुरंत खिवनी अभ्यारण्य पहुंचे।
वन विहार भोपाल शिफ्ट हुआ युवराज
खिवनी अभ्यारण्य के अधीक्षक विकास माहोरे ने बताया कि वन विहार के वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता के नेतृत्व में एक संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। घने जंगल के कक्ष क्रमांक 208 में घायल युवराज की लोकेशन मिली। करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने वन्यजीव नियमों का पालन करते हुए युवराज को ट्रेंकुलाइज किया। मौके पर ही उसका प्राथमिक उपचार किया गया और फिर एक विशेष एम्बुलेंस व पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के बीच उसे उच्च स्तरीय इलाज के लिए भोपाल के वन विहार शिफ्ट कर दिया गया, जहां फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है।
अधिराज की फुर्ती के आगे पस्त हुआ युवराज
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरी लड़ाई वर्चस्व और अपने इलाके पर पूरी तरह अधिपत्य जमाने को लेकर हुई थी। 10 साल का युवराज अब बूढ़ा हो चला था, जिसके कारण वह साढ़े चार साल के युवा और आक्रामक अधिराज की ताकत और फुर्ती का मुकाबला नहीं कर सका।
कैसे बदलता है जंगल का सिंहासन
विशेषज्ञ बताते हैं कि जंगल में बाघों का वर्चस्व 10 साल की उम्र के बाद प्राकृतिक रूप से घटने लगता है। ऐसे में इलाके के युवा नर बाघ पुराने और कमजोर हो रहे जंगल के मुखिया बाघ को चुनौती देते हैं। इस जानलेवा संघर्ष में जो बाघ हारता है, उसे इलाका छोडक़र जाना पड़ता है। वहीं जीतने वाला नया राजा पूरे इलाके में अपने मूत्र की गंध और पेड़ों पर पंजों के निशान छोडक़र दूसरे वन्यजीवों को संदेश देता है कि अब अल्फा मेल बदल चुका है और यहां का नया राजा वह खुद है। वर्तमान में खिवनी अभ्यारण्य में 7 से अधिक बाघों की मौजूदगी दर्ज है, जहां अब पूरी तरह अधिराज का राज कायम हो चुका है।