Sehore News: सीहोर। नगर पालिका चुनावों की उल्टी गिनती शुरू होने में अब कम ही समय शेष रह गया है, लेकिन शहर की जमीनी सियासत में विपक्षी दलों की सक्रियता को लेकर बड़े विरोधाभास नजर आ रहे हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस जहां जनता के मुद्दों को लेकर लगातार फील्ड में पसीना बहा रही है, वहीं चुनावों के दौरान बड़ी-बड़ी हुंकार भरने वाली बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी एक बार फिर साइलेंट मोड में चली गई हैं। इन दिनों दोनों ही दल जनहित के मुद्दों से पूरी तरह नदारद होकर सिर्फ अपनी बंद कमरों की आपसी बैठकों में व्यस्त हैं।
बता दें शहर की राजनीति का यह पुराना ढर्रा रहा है कि चुनावों के दौरान बसपा और आम आदमी पार्टी के उदय के बाद से खुद को तीसरे विकल्प के रूप में जोर-शोर से पेश करती हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि चुनाव निकलते ही ये पार्टियां जनता के बीच से गायब हो जाती हैं। वर्तमान में भी कुछ यही हाल है।
पिछली बार आप ने बिगाड़ा था कांग्रेस का खेल
गौरतलब है कि बीते नगर पालिका चुनाव में आम आदमी पार्टी ने कुछ वार्डों में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसका सबसे बड़ा उदाहरण वार्ड क्रमांक 25 था, जहां आप प्रत्याशी के मैदान में उतरने से वोटों का ऐसा ध्रूवीकरण हुआ कि कांग्रेस के कई सालों से जमे-जमाए मजबूत पार्षद को हार का सामना करना पड़ गया था। इस प्रदर्शन के बाद उम्मीद थी कि आप शहर के मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहेगी, लेकिन चुनाव खत्म होते ही पार्टी ने फिर से चुप्पी साध ली।
जनहित के मुद्दों से दूरी, कैसे मिलेगी कामयाबी
शहर में पानी, सडक़, साफ सफाई और बिजली जैसे कई स्थानीय जनहित के मुद्दे हैं, जिन पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस लगातार मुखर होकर प्रदर्शन कर रही है। इसके विपरीत बसपा और आम आदमी पार्टी ने इन जनसमस्याओं से पूरी तरह दूरी बना रखी है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि केवल बंद कमरों की बैठकों से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। अगर सवा साल बाद होने वाले नगर पालिका चुनाव में इन दलों को कोई करिश्मा करना है तो उन्हें बैठकों के दौर से बाहर निकलकर सडक़ पर उतरना होगा, वरना मैदान में सीधी लड़ाई एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सिमट कर रह जाएगी।


