सीहोर। सीवन नदी के सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट को लेकर शहर में मचे सियासी घमासान के बीच अब जुबानी तीर तीखे हो गए हैं। कांग्रेस द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर पलटवार करते हुए बीजेपी पार्षद मुकेश मेवाड़ा ने कांग्रेसी नेताओं को आड़े हाथों लिया है। मेवाड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेसी पार्षद सबको राहुल गांधी की तरह पप्पू समझते हैं, जबकि वे खुद केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए ड्रामा कर रहे हैं।
बीजेपी पार्षद मुकेश मेवाड़ा ने कहा कि सीवन नदी पर भ्रष्टाचार का रोना रोने वाले तीनों कांग्रेसी नेता (कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजीव गुजराती, नेता प्रतिपक्ष विवेक राठौर और ब्लॉक अध्यक्ष घनश्याम यादव) हमारी ही नगर पालिका परिषद के सदस्य हैं।
उन्होंने बताया कि यदि नदी पर कोई गलत या घटिया काम चल रहा थाए तो मौके पर जाकर राजनीतिक ड्रामा करने के बजाय इन पार्षदों को सबसे पहले हमारे अध्यक्ष जी, सीएमओ साहब या इंजीनियर से पूछना चाहिए था कि नगर पालिका ने इस पर क्या एक्शन लिया है, लेकिन ये ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि इन्हें सिर्फ राजनीति चमकानी है।
कांग्रेसी रोटियों पर फिर गया पानी
मुकेश मेवाड़ा ने कहा कि साफ किया कि नगर पालिका प्रशासन ठेकेदार की गड़बडिय़ों पर आंखें मूंदकर नहीं बैठा था। उन्होंने बताया कि ठेकेदार को अब तक तीन नोटिस दिए जा चुके हैं, जसमें 14 मई को गुणवत्ता सुधारने के लिए पहला नोटिस दिया गया। 2 जून काम में तेजी लाने और समय पर पूरा करने का दूसरा नोटिस थमाया गया। जबकि 23 जून को तीसरा और अंतिम नोटिस जारी कर साफ कह दिया गया है कि तुरंत सुधार न होने पर बिना बताए ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।
मेवाड़ा ने दावा किया कि कांग्रेसी पार्षदों को इन नोटिसों की जानकारी पहले से थी। इसके बावजूद वे जनता को गुमराह करने के लिए नदी किनारे पहुंच गए। आज जब हमने जनता के सामने सच रख दिया है तो उनकी इस राजनीतिक रोटी पर पूरी तरह पानी फिर गया है।
अपने वार्ड बेहाल छोडक़र दूसरी जगह चमका रहे राजनीति
स्वास्थ्य सभापति मुकेश मेवाड़ा ने कांग्रेस नेताओं को अपने गिरेबां में झांकने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि दूसरों पर उंगली उठाने से पहले इन नेताओं को अपने खुद के वार्डों का विकास देखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ये कांग्रेसी पार्षद चुनाव जीतने के बाद अपने वार्ड की जनता को भूल चुके हैं। स्वास्थ्य सभापति होने के नाते खुद मेरे पास कई बार इनके ही वार्डों के नागरिकों के फोन आते हैं। जनता रोती है कि उनके पार्षद चुनाव के बाद से इलाके में झांकने तक नहीं आए हैं और वे मुझसे काम कराने की गुहार लगाते हैं। खुद के वार्ड बेहाल छोडक़र ये नेता दूसरी जगहों पर जाकर केवल अपनी राजनीति चमकाने में लगे हैं।


