Sehore News: सीहोर। नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 11 से निर्दलीय पार्षद लोकेंद्र वर्मा (चौहान) की पार्षदी पर संकट के गहरे बादल मंडरा गए हैं। मध्य प्रदेश शासन की राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने एक बड़ा फैसला लेते हुए लोकेंद्र चौहान के बेलदार अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र को फर्जी/अमान्य पाते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त और राजसात करने का आदेश जारी कर दिया है। समिति की जांच में सामने आया है कि पार्षद लोकेंद्र चौहान अनुसूचित जाति के नहीं] बल्कि अन्य पिछड़ा वर्ग की (लूनिया) जाति के हैं।
दरअसल, लोकेंद्र चौहान के जाति प्रमाण पत्र को लेकर हाई कोर्ट याचिका क्रमांक डब्ल्यूपी नं. 3801/2023 में एक मामला चल रहा था। हाई कोर्ट के निर्देश पर अनुसूचित जाति विकास विभाग की राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने इस मामले की गहन जांच की। जांच के दौरान पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर सीहोर के माध्यम से अनुविभागीय अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई थी।
जांच में खुली पोल
छानबीन समिति द्वारा जारी आदेश के अनुसार लोकेंद्र चौहान को अपनी जाति साबित करने के कई मौके दिए गए। वे यह साबित करने में पूरी तरह असफल रहे कि वे अनुसूचित जाति की बेलदार उपजाति से आते हैं और उनका परिवार साल 1950 से मध्य प्रदेश में रह रहा है। इसके विपरीत जब समिति ने उनके पुराने स्कूली दस्तावेजों की जांच की तो सच सामने आ गया, वैष्णव बाल मंदिर महू इन्दौर इस स्कूल के दिनांक 14 अगस्त 1982 के आवेदन पत्र में लोकेंद्र की जाति लूनिया दर्ज पाई गई। कक्षा 12वीं का प्रशंसा पत्र इस दस्तावेज में भी उनकी जाति लूनिया ही लिखी हुई थी। मध्य प्रदेश शासन की आधिकारिक सूची में लूनिया जाति क्रमांक 44 पर अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत अधिसूचित है, न कि अनुसूचित जाति के तहत।
प्रमाण पत्र निरस्त करने का निर्णय
12 जून को हुई छानबीन समिति की उच्च स्तरीय बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि लोकेंद्र चौहान आत्मज इंद्रजीत चौहान निवासी लूनिया मोहल्ला गंज बेलदार अनुसूचित जाति के सदस्य नहीं हैं। इसके बाद अनुविभागीय अधिकारी सीहोर द्वारा 21 अगस्त 2018 को जारी किए गए जाति प्रमाण पत्र प्रकरण क्रमांक आरएस/445/0117/1147/2018 को निरस्त और राजसात कर लिया गया है। इस आदेश पर राज्य स्तरीय छानबीन समिति के आला अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं, जिनमें डॉ. ई. रमेश कुमार प्रमुख सचिव मप्र शासन अनुसूचित जाति कल्याण विभाग एवं अध्यक्ष, सौरभ कुमार सुमन आयुक्त अनुसूचित जाति विकास एवं सदस्य सचिव, पीके पाण्डेय सचिव मप्र राज्य अनुसूचित जाति आयोग एवं सदस्य, मातीदान केनेरिया सहायक अनुसंधान अधिकारी जनजातीय अनुसंधान संस्थान शामिल हैं।
अब आगे क्या
आयुक्त अनुसूचित जाति विकास भोपाल की ओर से यह आदेश सीहोर कलेक्टर को आवश्यक और उचित कानूनी कार्यवाही के लिए भेज दिया गया है। चूंकि लोकेंद्र चौहान ने आरक्षित वर्ग या आरक्षित दावों के प्रभाव के तहत चुनाव लड़ा या लाभ लिया होगा, इसलिए अब जाति प्रमाण पत्र निरस्त होने के बाद जिला प्रशासन उनकी पार्षदी रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।


