विधायकजी के चहेते प्रभारी सीएमओ की हुई विदाई…

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Sehore News: सीहोर। नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में सालों से पैर जमाए बैठे प्रभारी राज और रसूखदार बाबुओं के सुनहरे दिन अब लद गए हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी एक बेहद सख्त गाइडलाइन ने जिले के उन प्रभारी अधिकारियों की नींद उड़ा दी है, जो राजनीतिक संरक्षण के चलते दशकों से सीएमओ की कुर्सी से चिपके थे। इसी कड़ी में जिले के एक विधायक के चहेते माने जाने वाले प्रभारी सीएमओ की विदाई हो गई है, जो पिछले 16-17 सालों से एक ही पद पर काबिज थे। चर्चा है कि उनके स्थान पर अब किसी महिला अधिकारी की नियुक्ति होने जा रही है।
बता दें कि सीहोर जिले में कुल नौ नगरीय निकाय हैं, जिनमें दो नगर पालिकाएं और सात नगर परिषद शामिल हैं। नए नियमों के लागू होने से उन सभी निकायों में खलबली मच गई है जहां जूनियर कर्मचारियों को प्रभारी बनाकर सीएमओ की कमान सौंपी गई थी। अब किसी भी बाबू एलडीसी को मुख्य नगर पालिका अधिकारी का प्रभार नहीं दिया जा सकेगा।
जूनियर बाबू बॉस और सीनियर इंजीनियर मातहत
नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त कैलाश वानखेड़े द्वारा जारी आदेश ने एक बड़ी विसंगति को उजागर किया है। प्रदेश के करीब 50 निकायों में महज 1900 रुपये ग्रेड.पे वाले जूनियर बाबू सीएमओ बनकर बैठे थे। विडंबना यह थी कि उनके नीचे 5400 रुपये ग्रेड.पे वाले असिस्टेंट इंजीनियर और सब.इंजीनियर काम कर रहे थे। इस उल्टी गंगा को रोकने के लिए सरकार ने आदेश दिया है कि बाबू को प्रभार देना अब वित्तीय गड़बड़ी माना जाएगा।
अब भोपाल तय करेगा कौन होगा सीएमओ
नए नियमों के तहत अब संभाग स्तर से मनमर्जी की पोस्टिंग नहीं होगी। स्थानीय प्रशासन को योग्य उम्मीदवारों के नाम पहले संचालनालय भेजने होंगे, जहां से अंतिम मुहर लगेगी।
बाबू क्यों हुए अपात्र
नियमों के अनुसार सीएमओ का प्रभार केवल फीडर कैडर (प्रमोशन लाइन वाले पद) के अधिकारियों को ही दिया जा सकता है। इसमें सहायक ग्रेड.1 तो पात्र हैं, लेकिन सहायक ग्रेड.3 एलडीसी इस श्रेणी में नहीं आते।
अब किन्हें मिल सकता है प्रभार
नगरपालिका में सीएमओ का पद खाली होने पर अब केवल इन पदों के अधिकारियों को प्राथमिकता मिलेगी…
राजस्व अधिकारी और राजस्व निरीक्षक
कार्यालय अधीक्षक
राजस्व उप.निरीक्षक
सहायक वर्ग.1 और मुख्य लिपिक सह लेखापाल
नई चयन प्रक्रिया के तीन चरण

  1. जिले में तैनात राज्य सेवा के मूल पद वाले योग्य अधिकारी।
  2. जिले में उपलब्ध फीडर कैडर के योग्य कर्मचारी।
  3. जिले में पात्र न होने पर पूरे संभाग की योग्यता सूची से चयन।