Sehore: कल भगवान शनिदेव को मनाने करें यह उपाय…

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Sehore News: सीहोर। ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर कल पूरे जिले में भगवान शनिदेव का जन्मोत्सव पूरी श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस बार शनि जयंती पर भरणी नक्षत्र के साथ शनिश्चरी अमावस्या और वट सावित्री व्रत का एक बेहद दुर्लभ और पावन महासंयोग बन रहा है। इस खास मौके पर जिले के सभी शनि मंदिरों और देवालयों में सुबह से ही विशेष अनुष्ठान, हवन-पूजन और भगवान शनिदेव का तैल अभिषेक शुरू हो जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शनिदेव सूर्यदेव और माता छाया के पुत्र हैं। उन्हें भगवान शिव से यह आशीर्वाद प्राप्त है कि वे तीनों लोकों के प्राणियों को उनके द्वारा किए गए कर्मों के आधार पर फल प्रदान करेंगे। यही वजह है कि शनिदेव को सृष्टि का न्यायाधीश और कर्म फलदाता कहा जाता है। वे किसी के साथ अन्याय नहीं करते, बल्कि व्यक्ति के अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब रखते हैं।
इन राशियों पर है साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार वर्तमान ग्रह गोचर की स्थिति को देखें तो इस समय तीन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और दो राशियों पर ढैय्या का प्रभाव चल रहा है।
साढ़ेसाती: मेष राशि पर साढ़ेसाती का प्रथम चरण, मीन राशि पर द्वितीय चरण मध्य भाग और कुंभ राशि पर अंतिम चरण चल रहा है।
ढैय्या: सिंह और धनु राशि के जातकों पर इस समय शनि की ढैय्या का प्रभाव है।
पंडित शर्मा ने बताया कि जिन जातकों पर शनि का प्रभाव है, उनके लिए आज शनि जयंती का दिन कष्टों से मुक्ति पाने और शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सर्वोत्तम है। इस दिन शिव-शक्ति, हनुमान जी और शनिदेव की संयुक्त पूजा-अर्चना विशेष रूप से लाभप्रद और फलदायी सिद्ध होगी।
कल्याण के लिए आज क्या करें श्रद्धालु
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार शनि जयंती पर श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि और कष्टों के निवारण के लिए यह उपाय करना चाहिए…
अभिषेक व पूजन: शनिदेव का सरसों के तेल या तिल के तेल से अभिषेक करें। उन्हें काली उड़द, काले तिल, काला कपड़ा, इमरती और नीले फूल अर्पित करें।
पाठ व जाप: आज के दिन रुद्राभिषेक कराना सर्वश्रेष्ठ रहेगा। इसके अलावा हनुमान चालीसा, शनि चालीसा, शनि मंत्रों का जाप और दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ करने से शनि जनित दोषों शांत होते हैं।
दान का महत्व: एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखें, जिसे छायादान कहते हैं और फिर उसे दान कर दें। इसके अलावा गरीब व जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जूते और छाता दान करें।
वृक्ष पूजा: शाम के समय पीपल और शमी के वृक्ष के पास जाकर सरसों के तेल का दीपक अवश्य प्रज्वलित करें।
अखंड सौभाग्य के लिए वट सावित्री पूजा
शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या के इस महासंयोग के बीच वट सावित्री व्रत भी श्रद्धापूर्वक रखा जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए व्रत रखकर बरगद के वृक्ष की पूजा-अर्चना करेंगी, सूत का धागा लपेटकर परिक्रमा करेंगी और सत्यवान-सावित्री की कथा सुनेंगी। धार्मिक दृष्टि से एक ही दिन इन तीनों पर्वों का आना बेहद कल्याणकारी माना जा रहा है।