Sehore: बाबरी घाट पर मौत की सवारी, बरगी हादसे से भी नहीं जागा प्रशासन

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  • Sehore News: सीहोर। जबलपुर के बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है, लेकिन सीहोर जिला प्रशासन अब भी सजग नहीं हुआ है। नर्मदा नदी के बाबरी घाट पर नाव ठेकेदार द्वारा यात्रियों की जान से सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां सुरक्षा के नियम पूरी तरह कागजी साबित हो रहे हैं और हजारों लोग हर दिन अपनी जान हथेली पर रखकर नदी पार करने को मजबूर हैं।
    बता दें बाबरी घाट पर नियमों की धज्जियां उड़ाने का आलम यह है कि यहां नावों पर न केवल क्षमता से दोगुने यात्री बैठाए जा रहे हैं, बल्कि उन पर भारी-भरकम ट्रैक्टर, कार और बाइक भी लाद दी जाती हैं। छोटे से मुनाफे के लिए ठेकेदार नाव को मौत का फंदा बना रहे हैं। ओवरलोडिंग के कारण नाव का संतुलन कभी भी बिगड़ सकता है, जिससे एक बड़ा जल-हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
    सुरक्षा उपकरण ‘जीरो’, भगवान भरोसे यात्री
    हैरानी की बात यह है कि इन नावों में सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम भी नदारद हैं। नियमों के मुताबिक हर नाव पर लाइफ जैकेट और बचाव रिंग होना अनिवार्य है, लेकिन यहां यात्रियों को बिना किसी सुरक्षा कवच के गहरे पानी में उतारा जा रहा है। मोटर चालित नावों में आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र होने चाहिए, लेकिन बाबरी घाट पर ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं देता। यहां तक कि नावों पर उनकी क्षमता तक अंकित नहीं की गई है।
    न सूचना बोर्ड, न गोताखोरों की तैनाती
    नर्मदा के इस घाट पर आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने कोई तैयारी नहीं की है। घाट पर न तो कोई दिशा-निर्देशों वाला बोर्ड लगा है और न ही रेस्क्यू के लिए गोताखोर तैनात किए गए हैं। नदी के तेज बहाव और बदलता मौसम कभी भी मुसीबत बन सकता है, फिर भी स्थानीय प्रशासन मौन है।
    बरगी हादसे से नहीं लिया सबक
    बता दें कि एक दिन पहले जबलपुर के बरगी डैम में 74 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने क्रूज को डुबो दिया, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई और कई अब भी लापता हैं। वहां भी क्षमता से अधिक यात्री सवार होना ही हादसे का मुख्य कारण बना था। बाबरी घाट की स्थिति भी ठीक वैसी ही है, जहां क्षमता 29 की हो सकती है लेकिन सवारियां 45 से ज्यादा भरी जा रही हैं।
    स्थानीय निवासियों का आक्रोश
    ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन शायद किसी बड़ी लाशों की गिनती का इंतजार कर रहा है। बार-बार शिकायतों के बावजूद बाबरी घाट पर सघन चेकिंग नहीं की जा रही है। सवाल यह उठता है कि अगर कल यहां कोई बड़ा हादसा होता है तो क्या प्रशासन इसकी जिम्मेदारी लेगा।