Sehore: बरखेड़ी से हीरापुर तक लगी ट्रैक्टरों की लंबी कतार, भडक़े किसानों ने की नारेबाजी

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Sehore News: सीहोर। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गेहूं खरीदी का लक्ष्य और तारीख बढ़ाने के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत काफी परेशान करने वाली है। मुख्यालय के नजदीकी ग्राम बरखेड़ी में किसान तुलाई के लिए परेशान हैं। आलम यह है कि तुलाई की रफ्तार धीमी होने की वजह सेज बिलकिसगंज मार्ग पर बरखेड़ी से उलझावन तक ट्रेक्टर ट्रालियों की लंबी कतार लगी है। अव्यवस्थाओं से जूझ रहे किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। किसानों ने खरीदी केंद्र पर जमकर नारेबाजी की।
बता दें बरखेड़ी खरीदी केंद्र पर तौल का काम कछुआ गति से चलने के कारण लगभग 100 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पिछले 48 घंटों से कतार में खड़ी हैं। किसान अपना घर-बार छोडक़र सडक़ पर भूखे-प्यासे रात काटने को मजबूर हैं। किसानों का आरोप है कि केंद्र पर न तो बैठने की व्यवस्था है और न ही पर्याप्त स्टाफ।
बेमौसम बारिश ने बढ़ा दी चिंता
किसानों की सबसे बड़ी चिंता मौसम का बदलता मिजाज है। आसमान में छाए बादलों को देखकर किसान सहमे हुए हैं। उन्हें डर है कि यदि बेमौसम बारिश हुई तो खुले में खड़ी ट्रॉलियों में रखा हजारों क्विंटल गेहूं भीग जाएगा, जिससे पूरी फसल खराब हो सकती है। जबकि एक दिन पहले ही रविवार को अमलाहा में जोरदार बारिश हुई है। किसान व समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तुरंत तौल कांटों की संख्या नहीं बढ़ाई गई तो नुकसान की जिम्मेदारी शासन की होगी।
सीएम के फैसलों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
दूसरी ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा खरीदी लक्ष्य बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन करने और तारीख 9 मई तक बढ़ाने का किसानों ने स्वागत किया है। हालांकि किसानों ने कुछ गंभीर व्यावहारिक समस्याएं भी उठाई हैं, जिसमें स्लॉट बुकिंग में गफलत, छोटे और बड़े किसानों के लिए अलग-अलग समय पर पोर्टल खुलने से भ्रम की स्थिति बन रही है। किसानों की मांग है कि पारदर्शिता के लिए सभी श्रेणियों की बुकिंग एक साथ शुरू की जाए।
समय से हो भुगतान
कतारों में खड़े किसानों का कहना है कि शादियों का सीजन होने के कारण किसानों को तत्काल पैसे की जरूरत है। उन्होंने मांग की है कि भुगतान प्रक्रिया की देरी को खत्म कर राशि सीधे खाते में जल्द भेजी जाए। नाराज किसानों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि खरीदी केंद्रों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की जाए। सडक़ पर लग रहे जाम और किसानों की परेशानी को देखते हुए यदि जल्द ही तुलाई तेज नहीं की गई, तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।