Sehore News: सीहोर। अवैध खनन और परिवहन पर सख्ती के दावों के बीच प्रशासन की हालिया कार्रवाई अब खुद ही सवालों के घेरे में आ गई है। करीब 24 दिन पहले बड़े स्तर पर की गई संयुक्त कार्रवाई में जप्त किए गए 11 वाहन आज भी थानों में खड़े हैं, लेकिन उन पर जुर्माना तय करने और वसूली की वैधानिक प्रक्रिया शुरू तक नहीं हो सकी है। हालात यह हैं कि पूरी कार्रवाई कागजों और फाइलों में उलझकर रह गई है, जिससे प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
दरअसल 3 अप्रैल को राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने भैरूंदा, सिलकंठ और चोरसाखेड़ी क्षेत्र में अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान चलाकर 2 पोकलेन, 4 जेसीबी, 2 लोडर, 2 ट्रैक्टर-ट्रॉली और 1 पनडुब्बी ट्रैक्टर समेत कुल 11 वाहनों को जप्त किया था. उस समय इसे बड़ी सफलता बताते हुए अधिकारियों ने दावा किया था कि इस कार्रवाई से खनन माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। नियमानुसार जप्त वाहनों की फाइलें खनिज एवं राजस्व विभाग द्वारा तैयार कर जिला कलेक्टर कार्यालय भेजी जानी चाहिए थीं, ताकि जुर्माना तय कर वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ सके। हैरानी की बात यह है कि 24 दिन बीत जाने के बाद भी एक भी फाइल कलेक्टर कार्यालय तक नहीं पहुंची है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी फाइलों को आगे बढ़ाने में क्यों रुचि नहीं ले रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो खनिज विभाग द्वारा जप्त की गई पोकलेन मशीनों की फाइलें भी विभागीय स्तर पर ही अटकी हुई हैं। न जुर्माना तय हुआ और न ही वसूली की कोई पहल की गई। इससे शासन को राजस्व नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है। दूसरी ओर वाहन मालिक रोजाना तहसील से लेकर जिला खनिज कार्यालय तक चक्कर काट रहे हैंए लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा। आरोप यह भी लग रहे हैं कि जानबूझकर फाइलों को रोका जा रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था भी कटघरे में
थाना भैरूंदा और गोपालपुर परिसर में खड़े इन जप्त वाहनों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। वाहन मालिकों का आरोप है कि खड़े वाहनों से कीमती पाट्र्स और सामान गायब हो रहे हैं। हालांकि इस तरह के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैंए लेकिन जिम्मेदारों ने अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की है। इससे प्रशासन की मंशा और कार्यप्रणाली दोनों पर संदेह गहराता जा रहा है।
रात में जारी खनन, कार्रवाई पर संदेह
इधरए अवैध खनन पर लगाम लगाने के दावों के बीच नर्मदा नदी क्षेत्र में रात के अंधेरे में रेत का अवैध खनन जारी रहने की खबरें सामने आ रही हैं। पनडुब्बी मशीन, प्रोक्लेम और जेसीबी के जरिए खुलेआम खनन किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एक दिन की कार्रवाई क्या सिर्फ दिखावे के लिए थी या फिर किसी दबाव में की गई थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई और जुर्माना वसूली नहीं की गई तो माफियाओं के हौसले और बुलंद होंगे। वहीं यह भी चर्चा है कि अधिकारी किसी के इशारों पर फाइलों को दबाए बैठे हैं, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रशासन की साख दांव पर
शासन स्तर से अवैध खनन पर सख्ती के स्पष्ट निर्देश हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर लापरवाही और ढिलाई इन निर्देशों को कमजोर कर रही है। अब जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार अधिकारी तुरंत संज्ञान लेते हुए लंबित फाइलों को कलेक्टर कार्यालय भेजें और जुर्माना वसूली की प्रक्रिया जल्द शुरू करें। फिलहाल यह मामला प्रशासन की साख पर बड़ा सवालिया निशान बनकर खड़ा है।


