Sehore News: सीहोर। प्रदेश सहित जिले भर में भीषण गर्मी का दौर जारी है। पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे न केवल इंसान बल्कि पशु-पक्षी और जंगली जानवर भी हलाकान हैं। जंगलों में जलस्तर घटने और प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने के कारण वन्य प्राणी पानी की तलाश में बसाहटों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी तलाश में शनिवार को ग्राम लसुडिय़ा के पास हाईवे पर एक दुखद हादसा हो गया, जहां अज्ञात वाहन की टक्कर से एक मादा नीलगाय की जान चली गई।
ग्रामीणों की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और मृत नीलगाय के शव को अपने कब्जे में लिया। टीम ने घटनास्थल का पंचनामा तैयार किया। प्रथम दृष्टया यह साफ है कि नीलगाय को किसी तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने टक्कर मारी है। विभाग ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भिजवाया है, ताकि मौत के सटीक कारणों का पता चल सके।
भीषण गर्मी और पानी का संकट
बता दें कि गर्मी बढऩे के साथ ही जंगली जानवरों के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। प्यास बुझाने के चक्कर में ये जानवर जंगलों की सीमा लांघकर नेशनल हाईवे और गांवों की ओर आ रहे हैं, जहां वे दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। हालांकि वन विभाग हर साल दावा करता है कि वन्य प्राणियों के लिए जंगलों के भीतर पानी की हौद (टंकियों) की व्यवस्था की गई है, लेकिन मौजूदा हालातों को देखकर इन इंतजामों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अज्ञात वाहन की तलाश जारी
वन अधिकारियों के अनुसार नीलगाय वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत अनुसूची-3 का संरक्षित प्राणी है, इसलिए इसकी मृत्यु को गंभीरता से लिया जा रहा है। विभाग ने मामला दर्ज कर लिया है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि टक्कर मारने वाले वाहन की पहचान की जा सके।
जंगलों में बढ़े पानी के इंतजाम
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर वन विभाग जंगलों के भीतर पानी की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करे तो जानवरों को सडक़ों की ओर नहीं आना पड़ेगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि गर्मी को देखते हुए विभाग अपने जल स्रोतों की नियमित निगरानी करे और उनमें पानी भरवाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।


