Sehore News: सीहोर। जावर (डोडी) क्षेत्र में दो महीने पहले पकड़े गए नकली घी के बड़े जखीरे ने अब आम जनता के भरोसे को हिला कर रख दिया है। प्रतिष्ठित सरकारी ब्रांड ‘सांची’ के नाम पर जहर परोसने का खेल उजागर होने के बावजूद, अब तक दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज न होना प्रशासन और सांची प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हालात यह हैं कि आष्टा क्षेत्र के बाजारों में अब लोग ‘असली’ सांची घी खरीदने से भी कतराने लगे हैं।
सबसे ज्यादा हैरानी सांची प्रबंधन के रवैये पर हो रही है। एक नामी सरकारी ब्रांड, जिसकी शुद्धता पर करोड़ों लोग भरोसा करते हैं, उसके नाम का दुरुपयोग कर नकली घी बेचा जा रहा था। इसके बावजूद प्रबंधन ने अब तक जालसाजों के खिलाफ कड़ा रुख नहीं अपनाया है। न तो प्रबंधन की ओर से कोई सफाई आई है और न ही दोषियों पर कार्रवाई के लिए कोई सक्रियता दिखाई गई है। सांची की इस लंबी चुप्पी ने क्षेत्र में मिलीभगत की चर्चाओं को हवा दे दी है।
फाइलों में कैद कार्रवाई, खुले घूम रहे जालसाज
मामला फरवरी माह का है, जब डोडी गांव में मानसिंह सेंधव के मकान पर छापा मारा गया था। यहां कल्याणपुरा निवासी गौरव वर्मा सांची ब्रांड का नकली घी बना रहा था। मौके से 792 किलोग्राम नकली घी, सांची के रैपर और वनस्पति घी के डिब्बे जब्त किए गए थे। लेकिन विडंबना देखिए कि जावर पुलिस का कहना है कि उन्हें खाद्य विभाग से अब तक जांच रिपोर्ट ही नहीं मिली है, इसलिए हाथ बंधे हैं। खाद्य विभाग का बहाना है कि सैंपल लैब भेजे गए हैं और रिपोर्ट आने का इंतजार है। नतीजतन मास्टरमाइंड आज भी कानून की गिरफ्त से बाहर है।
बाजार में बढ़ता अविश्वास
नकली घी पकड़े जाने के बाद आष्टा और आसपास के इलाकों में सांची घी की साख को गहरा धक्का लगा है। दुकानदार बताते हैं कि ग्राहक अब पैकेट हाथ में लेने के बाद शुद्धता को लेकर कई सवाल पूछते हैं और अक्सर डर के मारे खरीदारी नहीं करते। लोगों का कहना है कि अगर सरकारी ब्रांड के नाम पर ऐसा खिलवाड़ हो रहा है और प्रशासन मौन है, तो वे अपनी सेहत को जोखिम में क्यों डालें।
जनता के अनसुलझे सवाल
क्षेत्र के नागरिकों का आरोप है कि स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण मिल रहा है। आखिर क्यों 60 दिन बीत जाने के बाद भी एक प्रतिष्ठित ब्रांड अपनी छवि साफ करने के लिए आगे नहीं आया। क्या विभाग केवल रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है या मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश हो रही है।


